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डेल्ही क्राइम सीज़न 2: क्या सपने देखने का हक़ हमें नहीं है?

क्या आपने ग़ौर किया है कि समाज में हर चीज़ का लस्ट बढ़ रहा है!

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
September 9, 2022
in ओए एंटरटेन्मेंट, ज़रूर पढ़ें, रिव्यूज़
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नेटफ़्लिक्स की वेब सीरीज़ डेल्ही क्राइम सीज़न 2 की समीक्षा कर रही हैं जानीमानी कथाकार जयंती रंगनाथन, ताकि आप यह निर्णय ले सकें कि आपके इस सीरीज़ का दूसरा भाग देखना चाहिए या नहीं. और यदि देखना चाहिए तो आख़िर क्यों देखना चाहिए?

 

डेल्ही क्राइम के सीज़न 2 में इस बार क्राइम अलग है. दिल्ली के रिच और पॉश इलाक़े में रहने वाले सीनियर सिटिज़न्स का सिर पर हथौड़ी से पीट-पीट कर जघन्य मर्डर. शक़ जा रहा है नब्बे के दशक में सक्रिय कच्छा बनियान गैंग पर. कहानी बेहद रोमांचक है. अंत तक सस्पेंस बना रहता है.

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इस सीरीज़ की ख़ासियत है, इसमें काम करने वाले कलाकार. शेफाली शाह, रसिका दुग्गल, राजेश तैलंग और नया एडिशन तिलोत्तमा शोम ऐसे एक्टर्स हैं, जो क़िरदार में पूरी तरह डूब जाते हैं.

दिल्ली पुलिस की डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी और उनकी टीम इस बार ऐसे क़ातिलों का पीछा कर रही है, जो अपने पीछे कोई निशान या गलती नहीं छोड़ रहे हैं. उनका पीछा करते-करते दिल्ली पुलिस कई मुक़ामों से गुज़रती है. पुलिस महकमे के अंदर का सच, राजधानी दिल्ली के अंधेरे कोने और सबके अपने-अपने दर्द और सपनों को बेहद सलीके से बुना गया है.

मैं और कुछ कह कर सस्पेंस ख़राब नहीं करना चाहती. पर यह ज़रूर कहूंगी कि महानगर में आने के बाद हर कोई सपना देखता है, एक अच्छी ज़िंदगी जीने का. उनके सपने आप कैसे छीन सकते हैं? पर अपने सपनों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वो ज़रूर छीनेंगे, आपका सब कुछ, यहां तक कि आपकी ज़िंदगी भी.

मैं गाजियाबाद बॉर्डर पर जहां रहती हूं, वहां आए दिन मेट्रो स्टेशन से ले कर मार्केट तक रोज ही मोइरसाइकिल पर सवार युवा राह चलते, रिक्शे में बैठे लोगों से मोबाइल या पर्स ले कर उड़न छू हो जाते हैं. अभी दो दिन पहले मेरी बिल्डिंग में रहने वाली एक कॉलेज गोइंग लड़की ने बताया कि उसका मोबाइल छीनने वाली मोटर साइकिल के पीछे बैठी एक लड़की थी. मुंह पर मास्क था और बाल खुले हुए थे. कुछ दिन पहले बाज़ार में मोटर साइकिल पर आए लड़के एक सीनियर सिटिज़न महिला के कानों से सोने का झुमका खींच कर, उन्हें घायल कर भाग गए. ये छोटी-मोटी चोरियां वो अपनी अय्याशी के लिए करते हैं, होटल में खाना, महंगे कपड़े लेना, घूमना अपनी गर्ल फ्रेंड को गिफ़्ट देना.

समाज में हर चीज़ का लस्ट बढ़ रहा है. ये चीज़ उसके पास है, हमारे पास क्यों नहीं वाला लस्ट. आख़िरी एपिसोड में अपराधी सवाल करता है: क्या सपने देखने का हक़ हमें नहीं है?
तो आप इस सवाल का जवाब दीजिए और दिल्ली पुलिस को अपना काम करने दीजिए…

फ़ोटो: इन्स्टाग्राम

Tags: delhi crime season 2netflixWeb Seriesडेल्ही क्राइम सीज़न 2नेटफ़्लिक्सवेब सीरीज़
टीम अफ़लातून

टीम अफ़लातून

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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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