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Home ज़रूर पढ़ें

ठंड के दिनों में पेट के गुड़गुड़ाने की आवाज़ ज़्यादा क्यों आती है?

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
January 16, 2026
in ज़रूर पढ़ें, फ़िटनेस, हेल्थ
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क्या आपने भी इस बात पर ध्यान दिया है कि ठंड के दिनों में पेट से गुड़-गुड़ की आवाज़ें कुछ ज़्यादा ही सुनाई देती हैं? आइए, जानते हैं कि इसकी वजह क्या है और कहीं ये हानिकारक तो नहीं हैं या फिर ये कब हानिकारक हो सकती हैं?

ठंड के दिनों में पेट से “गुड़-गुड़” जैसी अजीब आवाज़ों का, जिन्हें मेडिकल भाषा में बोर्बोर्गमी (borborygmi) कहा जाता है, ज़्यादा सुनाई देना एक सामान्य बात है. ये आवाज़ें मुख्य रूप से हमारी आंतों (intestines) में गैस, तरल पदार्थ और भोजन के मूवमेंट से तब पैदा होती हैं, जब पेरिस्टाल्सिस यानी आंतों की मांसपेशियों की संकुचन की क्रिया होती है. यह भी सच है कि ठंड में ये गुड़गुड़ाहट ज़्यादा होती. इसका मुख्य वैज्ञानिक कारण मौसम से जुड़े लाइफ़स्टाइल और फ़िज़ियोलॉजिकल बदलाव हैं, जो पाचन की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं.

कम फ़िज़िकल ऐक्टिविटी और धीमा मेटाबॉलिज़्म: ठंड में लोग अधिकतर घरों के भीतर ही रहते हैं और शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे मेटाबॉलिज़्म यानी शरीर के चयापचय की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. इससे आंतों का मूवमेंट (पेरिस्टाल्सिस) प्रभावित होता है, गैस ट्रैप हो जाती है और यह पेट में ज़्यादा आवाज़ें पैदा करती है.

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ठंड के मुताबिक शरीर की प्राथमिकता बदलना: ठंड में हमारा शरीर हीट कंज़र्व करने के लिए एनर्जी को प्राथमिकता देता है, जिससे पाचन एन्ज़ाइम्स का उत्पादन कम हो सकता है और अपच (indigestion) बढ़ता है. इससे हाइड्रोजन और मीथेन जैसी गैसें ज़्यादा बनती हैं, जो पेट से आने वाली गुड़-गुड़ की आवाज़ का कारण बनती हैं. अगर आप ठंड में दिनभर लंबे समय तक बैठकर काम करते या टीवी देखते हैं तो भोजन आंतों में धीरे-धीरे मूव करता है और गैस बिल्डअप से शाम के समय पेट से आने वाली ये आवाज़ें ज़्यादा सुनाई देती हैं.

कम पानी का सेवन और डिहाइड्रेशन: ठंड में हमें प्यास भी कम लगती है और हम सामान्य से कम पानी पीते हैं. इससे पाचन रस (digestive fluids) गाढ़े हो जाते हैं, कब्ज़ (constipation) बढ़ता है, और आंतों में गैस का मूवमेंट ज़्यादा शोर पैदा करता है. डिहाइड्रेशन से आंतों की लाइनिंग सूख जाती है, जिससे पेरिस्टाल्सिस के दौरान तरल पदार्थ कम होने पर पेट से आने वाली ये आवाज़ें तेज़ हो जाती हैं.

डाइट में बदलाव: ठंड में लोग गर्म रहने के लिए ज़्यादा कैलोरी वाला, तैलीय, मसालेदार या मीठा खाना, जैसे- पकौड़े, नट्स, मीट, सूप या चाय, आदि का सेवन करते हैं. इस तरह का भोजन फ़र्मेंटेशन से ज़्यादा गैस (जैसे मीथेन) प्रोड्यूस करते हैं, जो आंतों में मूव करते हुए पेट में होने वाली आवाज़ को बढ़ाते हैं. ज़्यादा फ़ैट के सेवन से ऐसिड रिफ़्लक्स (acid reflux) होता है, जो पेट में अतिरिक्त दबाव बनाता है. ठंड में अगर आप ज़्यादा तली हुई चीज़ें या कार्बोहाइड्रेट्स (जैसे ब्रेड, पास्ता) खाते हैं तो आंतों में फ्रक्टोज़ और सोर्बिटोल जैसी चीज़ें गैस बनाती हैं, जिससे सोते समय आपके पेट से गुड़-गुड़ की आवाज़ ज़्यादा आती है.

इन आवाज़ों को कम करने के लिए क्या करें:
1. पानी ज़्यादा पिएं
2. समय पर भोजन करें
3. संतुलित भोजन करें
4. रोज़ व्यायाम करें
5. काम के लिए लगातार बैठे न रहें, बल्कि बीच-बीच में उठकर ब्रेक लेते रहें
6. सर्दी से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें

यूं तो ये आवाज़ें अक्सर हानिरहित ही होती हैं, लेकिन यदि इन आवाज़ों के साथ आपको दर्द, डायरिया या वज़न का घटना महसूस हो तो डॉक्टर से चेकअप कराएं.

फ़ोटो: फ्रीपिक

 

Tags: borborygmicauses of stomach growlingcoldstomach growlingठंडपेट का गुड़गुड़ानापेट गुड़गुड़ाने के कारणबोर्बोर्गमी
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