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वैवाहिक रिश्तों में ये बातें बनाए रखेंगी सही संतुलन

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
May 29, 2021
in ज़रूर पढ़ें, प्यार-परिवार, रिलेशनशिप
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वैवाहिक रिश्तों में ये बातें बनाए रखेंगी सही संतुलन
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जितनी तेज़ी से समय बदल रहा है, लड़के-लड़कियों की परवरिश का तरीक़ा बदल रहा है, उनके व्यस्त रहने का समय बढ़ रहा है, उतनी ही तेज़ी से वैवाहिक रिश्तों में शामिल आज के युवक-युवतियों के लिए बढ़ रही हैं, वैवाहिक रिश्तों से उपजी चुनौतियां. किस तरह इन चुनौतियों का सामना करते हुए वैवाहिक रिश्तों में साधा जा सकता है संतुलन, यहां हम इसी के बारे में बता रहे हैं.

वो पुराने समय की बात हो गई, जब महिलाएं घर पर रहकर बच्चों की परवरिश को ही अपना ध्येय माना करती थीं. समय बदला, लड़कियों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और उनके भीतर अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा जागी. कई युवतियां अच्छे पदों पर हैं और युवक तो हमेशा से ही फ़ायनांशियली इन्डिपेंडेंट रहे ही हैं. समस्या वहां आ खड़ी हुई कि युवकों ने अपनी मांओं को जिस तरह काम करते देखा, वे अपनी पत्नियों से भी उसी तरह के काम की उम्मीद करते रहे, जबकि उनकी पत्नियों की भूमिका, उनकी मांओं की तुलना में बहुत बदल चुकी है. ऐसे में वैवाहिक रिश्तों में संतुलन साधने के लिए पति-पत्नी दोनों को ही साथ बैठकर इस मुद्दे पर ध्यान देना होगा. जहां पति ये समझे कि मेरी पत्नी यदि आर्थिक क्षेत्र में हमारे परिवार को संबल दे रही है, जो पहले केवल पुरुषों का ही काम होता था तो अब घर के कामों के क्षेत्र में, जो पहले केवल महिलाओं का ही काम होता था, मुझे उसकी मदद करनी होगी.
इसके अलावा भी कई छोटी-छोटी बाते हैं, जिनपर ध्यान देकर या बातचीत कर के आपदोनों अपने वैवाहिक जीवन में संतुलन साधे रख सकते हैं. आइए जानें, वे कौन-सी बाते हैं…

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बातचीत का रास्ता खुला रखना
आप दोनों के बीच चाहे जिस भी बात को लेकर कहासुनी हुई हो, लेकिन उसके बाद यदि आप दोनों मुंह फुलाकर बैठ जाएंगे और बातचीत नहीं करेंगे तो समस्या का समाधान हो ही नहीं पाएगा. अत: इस बात को गांठ बांध लें कि किसी भी जिरह-बहस के बाद दिमाग़ ठंडा होने पर अपने साथी के साथ उस मुद्दे पर बात करें. हम बात करने कह रहे हैं… दोबारा लड़ने नहीं! बात इस बात पर करें कि जो हुआ उससे कैसे बचा जा सकता था. और बातचीत का रास्ता कभी-भी बंद न करें. यदि आप इस मंत्र को याद रखेंगे तो बतौर कपल रिश्तों के संतुलन की आधी बाज़ी तो समझिए आपने मार ही ली.

फ़ायनांसेस को लेकर बिल्कुल स्पष्ट रहें
जी हां, भले ही आप पति-पत्नी हैं… लेकिन यदि आप दोनों कमा रहे हैं तो फ़ायनांसेस को लेकर आप दोनों की सहमति से एक रणनीति बनाइए और उस पर पूरी तरह से अड़े रहिए. आप दोनों पूल इन कर के घर का ख़र्च चलाना चाहते हैं, आपका साथी निवेश करना चाहता है या फिर आपका साथी घर ख़र्च चलाना चाहता है और आप निवेश करेंगे इन सभी मामलों पर पहले ही चर्चा कर लें और जो भी बाता साझा तौर पर आप दोनों को सूट करती हो उसका पूरी तरह पालन करें. विवाह के शुरुआती कुछ सालों में पैसों के मामले में जो तय किया उसपर स्ट्रिक्ट बने रहने से आप दोनों के बीच भरोसा बढ़ेगा और विवाह भरोसे पर ही तो टिकी रहने वाली संस्था है, है ना?

सवाल पूछते रहें, लेकिन सलीके से
जैसा कि हमने कहा कि विवाह भरोसे पर ही टिका होता है. अत: यदि किसी बात को लेकर आपका भरोसा अपने साथी पर से डगमगा रहा है तो उससे सवाल पूछें. पर सवाल पूछने का तरीक़ा, सवाल पूछने जैसा होना चाहिए, आरोप लगाने जैसा नहीं. यदि कोई बात आपको तंग कर रही है तो उसके बारे में अपने साथी से खुलकर सवाल पूछें और उसके जवाब से संतुष्ट न हों तो और सवाल पूछें. यदि कोई डर है मन में तो उसे भी साझा करें, ताकि आपका साथी आपके कन्सर्न को समझ सके. एक-दूसरे से सवाल पूछने वाले कपल अपने रिश्ते को लेकर संजीदा होते हैं. और जब हम सवाल पूछते हैं तो उनके जवाबों से ज़िंदगी के रास्ते भी तो तलाशते रहते हैं.

हर तरह के काम को बांट लें
आप दोनों कामकाजी हैं और अपने-अपने ऑफ़िस का काम करते हैं तो ज़ाहिर है दोनों ही थक जाते होंगे. ऐसे में घर के कामों में अपने साथी का हाथ बंटाना बहुत ज़रूरी है. यदि पति ने हमेशा अपनी मां को किचन का और घर का काम करते हुए देखा है तो अपनी पत्नी से भी यही उम्मीद रखना उसकी आदत में शामिल हो जाता है. लेकिन जहां पति को यह समझना होगा कि कामकाजी महिला पर घर की पूरी जवाबदारी डाल देने से, उसपर काम का बहुत अधिक भार आ जाएगा तो मुझे मदद करनी ही चाहिए, वहीं पत्नी को भी इस बात का धीरज रखना होगा कि बहुत लंबे समय से चली आ रही पुरुषों की कंडिशनिंग रातोंरात नहीं बदलेगी. धीरे-धीरे आप उनमें बदलाव महसूस करेंगी, वो भी केवल तब, जबकि आप उन्हें सही तरीक़े से इन बातों को समझा सकेंगी. घर के कामों को भी इस तरह बांटा जा सकता है कि उनमें से कुछ पति के हिस्से में आएं और कुछ पत्नी के. अब ये काम क्या होंगे ये तो आप दोनों को अपनी स्किल्स के आधार पर ही तय करना होगा. पर हमारा यक़ीन मानिए, काम बांट लेने से आपके बीच विवाद की नौबत कम ही आएगी.

फ़ोटो: पिन्टरेस्ट

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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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