राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा मुंबई के पु. ल .देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी में आयोजित पांच दिवसीय किताब उत्सव का तीसरा दिन नई पुस्तकों के लोकार्पण, चर्चाओं और रोचक प्रस्तुतियों से भरा रहा. इस दौरान चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फ़िल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ की पटकथा और छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर केंद्रित विश्वास पाटील की उपन्यास शृंखला ‘महासम्राट शिवाजी’ के दूसरे खंड का लोकार्पण हुआ. ‘दलित लेखन : नए दौर के नए सवाल’ विषय पर चर्चा और ‘हिन्दी उपन्यास का स्त्री-वर्ष’ पर केंद्रित सत्र आयोजित हुए. ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ पर दास्तानगोई बैठक हुई, जिसमें राणा प्रताप सेंगर और आशीष रावत ने अपनी रोचक प्रस्तुति दी. दिन का समापन आर. एस. विकल के निर्देशन में धूमिल की बहुचर्चित कविता ‘पटकथा’ की राजेन्द्र गुप्ता द्वारा एकल प्रस्तुति के साथ हुआ.
कार्यक्रम की शुरुआत चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फ़िल्म ‘मोहल्ला अस्सी’ की पटकथा के लोकार्पण के साथ हुई, जिसके बाद किताब के संपादक अजय ब्रह्मात्मज और चंद्रप्रकाश द्विवेदी के बीच कथा और पटकथा लेखन की प्रक्रिया, उसकी चुनौतियों और बदलते रुझानों पर विस्तार से चर्चा हुई. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि पटकथा लेखन एक ऐसी विधा है, जिसे व्यक्ति निरंतर सीखता रहता है.
इसके बाद छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर केंद्रित विश्वास पाटील की उपन्यास शृंखला ‘महासम्राट शिवाजी’ के दूसरे खंड का लोकार्पण हुआ. इस दौरान लेखक विश्वास पाटील, चंद्रप्रकाश द्विवेदी, अतुल तिवारी, अनुवादक रवि बुले और ओम प्रकाश तिवारी के बीच किताब पर चर्चा हुई.
किताब उत्सव में 9 फ़रवरी रविवार के आकर्षण
शुरुआत पंडित अमरनाथ के काव्य-संग्रह ‘हंसा के बैन’ के लोकार्पण से होगी. इस दौरान रेखा भारद्वाज और गजरा कोट्टरी से संजीव चिम्मलगी बातचीत करेंगे. इसके बाद गुलज़ार के गीत-संग्रह ‘गुनगुनाइए’ के संदर्भ में यूनुस ख़ान उनसे बातचीत करेंगे. अगले सत्र में निदा फ़ाज़ली के कविता-संग्रह ‘मोरनाच’ के पुनर्नव संस्करण का लोकार्पण होगा, जिसमें मालती जोशी से हरि मृदुल बातचीत करेंगे और अभिषेक शुक्ला कविताओं का पाठ करेंगे. इसके बाद ‘युगसारथी धर्मवीर भारती’ का लोकार्पण होगा, जिसमें सूर्यबाला, चित्रा देसाई और गंगाशरण सिंह भाग लेंगे. फिर कविता पाठ सत्र होगा, जिसमें पुनीत शर्मा, पराग पावन, अभिषेक शुक्ला और प्रदीप अवस्थी शामिल होंगे. अगले सत्र में ‘हिंदुत्व का गणराज्य’ किताब के संदर्भ में लेखक बद्रीनारायण से डॉ. बालाजी चिरडे बातचीत करेंगे. इसके बाद ‘काव्य-संध्या’ होगी, जिसमें आभा बोधिसत्व, कमलेश पाठक, चित्रा देसाई, मालवी मल्होत्रा, मोनिका सिंह, शैलजा पाठक और संवेदना रावत काव्यपाठ करेंगे. दिन का समापन शैलेश श्रीवास्तव और डॉ. अलका अग्रवाल सिगतिया की संगीत प्रस्तुति के साथ होगा.
तीसरे सत्र में ‘दलित लेखन: नए दौर के नए सवाल’ विषय पर अनिमेष मुखर्जी ने लक्ष्मण गायकवाड़, शरण कुमार लिम्बाले, सुलभा कोरे और पराग पावन से बातचीत की. चर्चा की शुरुआत करते हुए अनिमेष मुखर्जी ने दलित साहित्य की पृष्ठभूमि और इसके बदलते स्वरूप पर प्रश्न किए. सत्र के समापन पर श्रोताओं और पाठकों ने वक्ताओं से गंभीर और रोचक प्रश्न पूछे.
अगला सत्र राजकमल प्रकाशन द्वारा मनाए जा रहे ‘हिन्दी उपन्यास का स्त्री-वर्ष’ पर केंद्रित रहा. स्त्री-वर्ष के तहत राजकमल नौ प्रमुख हिन्दी कथाकारों के उपन्यास एकसाथ सामने लाया है, जिसने साहित्य जगत का व्यापक ध्यान आकर्षित किया है. सत्र के दौरान सविता भार्गव ने वक्तव्य दिया, वहीं सुशील गजवानी, विभा रानी और इला जोशी ने उपन्यासों से भावपूर्ण अंशपाठ किया.
इसके बाद महमूद फ़ारूक़ी द्वारा तैयार पुस्तक ‘दास्तान-ए-गुरुदत्त’ का लोकार्पण असगर वजाहत के हाथों सम्पन्न हुआ. इस अवसर पर राणा प्रताप सेंगर और आशीष रावत ने दास्तान के संक्षिप्त रूप की प्रभावशाली प्रस्तुति दी.
दिन का समापन आर. एस. विकल द्वारा निर्देशित धूमिल की कविता ‘पटकथा’ की एकल प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसमें राजेन्द्र गुप्ता ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.







