राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी में आयोजित पांच दिवसीय किताब उत्सव में रविवार को गुलज़ार के गीत-संग्रह ‘गुनगुनाइए’ के अलावा भी कई अन्य किताबों का लोकार्णण हुआ, जिसमें पंडित अमरनाथ, निदा फ़ाज़ली, गंगाशरण सिंह और शैलजा पाठक की किताबें शामिल रहीं.
रविवार को कार्यक्रम की शुरुआत पंडित अमरनाथ के काव्य-संग्रह ‘हंसा के बैन’ के लोकार्पण के साथ हुई। इस अवसर पर रेखा भारद्वाज और गजरा कोट्टारी से संजीव चिम्मलगी ने संवाद किया।
इसके बाद गुलज़ार के गीत-संग्रह ‘गुनगुनाइए’ के संदर्भ में यूनुस ख़ान ने उनसे बातचीत की। गुनगुनाइए संग्रह में गुलज़ार द्वारा लिखे गए पाँच सौ गीत संकलित कर पहली बार एक साथ प्रकाशित किए गए हैं। बातचीत के दौरान गुलज़ार ने अपने कई चर्चित गीतों के बनने से जुड़े रोचक क़िस्से साझा किए। उन्होंने कहा कि धुनों पर गीत लिखने की सबसे खूबसूरत बात यह है कि उसमें नए-नए मीटर मिलते हैं और वे इसे एक रचनात्मक सुविधा के रूप में देखते हैं।
अगले सत्र में प्रख्यात शायर निदा फ़ाज़ली के कविता-संग्रह ‘मोरनाच’ के पुनर्नवा संस्करण का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर लेखिका मालती जोशी से हरि मृदुल ने संवाद किया, जबकि अभिषेक शुक्ला ने संग्रह से चयनित कविताओं का पाठ किया।
मालती जोशी ने भावुक स्मृतियाँ साझा करते हुए कहा कि निदा साहब को बिछड़े हुए आज दस साल और एक दिन हो गए हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में जो भी घटता था, वह शायरी में ढल जाता था। वे बहुत कुछ कहते थे पर बोलकर नहीं, अपनी रचनाओं के ज़रिए कहते थे।
इसके बाद गंगाशरण सिंह की पुस्तक ‘युगसारथी धर्मवीर भारती’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर सूर्यबाला, चित्रा देसाई और लेखक गंगाशरण सिंह उपस्थित रहे।
अगला सत्र युवा कवियों के कविता-पाठ का रहा, जिसमें पुनीत शर्मा, पराग पावन, अभिषेक शुक्ला और प्रदीप अवस्थी ने अपनी रचनाएँ सुनाईं। इसी दौरान पराग पावन के संग्रह ‘जब हर हँसी संदिग्ध थी’ और प्रदीप अवस्थी के संग्रह ‘एक भरम अच्छा जिया’ का लोकार्पण भी किया गया।
अगले सत्र में बद्रीनारायण की पुस्तक ‘हिंदुत्व का गणराज्य’ के संदर्भ में डॉ. बालाजी चिरडे ने लेखक से संवाद किया।
इसके बाद ‘काव्य-संध्या’ का आयोजन हुआ, जिसमें आभा बोधिसत्व, कमलेश पाठक, चित्रा देसाई, मालवी मल्होत्रा, मोनिका सिंह, शैलजा पाठक और संवेदना रावत ने काव्यपाठ किया। इसी अवसर पर शैलजा पाठक की नई किताब ‘मन कागज़ तन बुलबुला’ का लोकार्पण हुआ। दिन का समापन शैलेश श्रीवास्तव और डॉ. अलका अग्रवाल सिगतिया की भावपूर्ण संगीत-प्रस्तुति के साथ हुआ।







