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ओए अफ़लातून
Home ज़रूर पढ़ें

कहीं आपको भी त्यौहारों की तड़क-भड़क परेशान तो नहीं करती?

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
December 15, 2023
in ज़रूर पढ़ें, मेंटल हेल्थ, हेल्थ
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कहीं आपको भी त्यौहारों की तड़क-भड़क परेशान तो नहीं करती?
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यदि आप भी उन लोगों में से हैं, जिन्हें त्यौहारों के दौरान तड़क-भड़क, गहमा-गहमी, लोगों से मिलना-जुलना या पार्टीज़ पसंद नहीं आतीं तो जान लें कि आप अकेले ही ऐसे/ऐसी नहीं है. छुट्टियों या त्यौहारों के दौरान ख़ासतौर पर नवंबर दिसंबर में उदास या निराश महसूस करने को हॉलिडे ब्लूज़ या हॉलिडे डिप्रेशन कहा जाता है. आइए, इसके बारे में और जानते हैं, ताकि यदि आपको या आपके किसी जानने वाले को ऐसा महसूस होता है तो हम इससे उबरने में उसकी मदद कर सकें.

यदि त्यौहारों के दौरान आपको ख़ालीपन, अकेलापन महसूस होता है; आपकी नींद अचानक कम या ज़्यादा हो जाती है; आपकी भूख अचानक बढ़ जाती है या आपको भूख लगना ही बंद हो जाती है; ज़्यादा थकान महसूस करते हैं; ग्लानि महसूस करते हैं; चिड़चिड़ापन, नाख़ुश और उदास महसूस करते/करती हैं तो बहुत संभव है कि आप हॉलिडे ब्लूज़ से गुज़र रहे/रही हैं. और यह समस्या बहुत आम है. यह भी सच है कि पैन्डेमिक के बाद कई लोगों को ऐसा ज़्यादा महसूस होने लगा है.

हॉलिडे ब्लूज़ के बारे में यदि आप यह सोचते हैं कि यह केवल उन लोगों को होता है, जो छुट्टियां पसंद नहीं करते तो आप ग़लत हैं. त्यौहारों के दौरान अत्यधिक भावनात्मक दबाव के चलते भी कई लोगों ऐसे लोगों को, जो त्यौहार पसंद करते हैं, भी हॉलिडे ब्लूज़ महसूस होते हैं. वहीं शोध बताते हैं कि ऐसे लोग जो पहले से ही मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हों, उनमें त्यौहारों के समय हॉलिडे ब्लूज़ होने की संभावना ज़्यादा होती है. ऐसे में ज़रूरी है कि हम हॉलिडे ब्लूज़ से निपटने में ख़ुद की या जो इससे गुज़र रहा है उसकी मदद करें. आइए, यहां इसका तरीक़ा जानते हैं.

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अपनी भावनाओं को स्वीकारें
ख़ुद को और अपनी भावनाओं को जस का तस स्वीकार करना बहुत कठिन है, लेकिन यह स्वीकार्यता ही वह पहला क़दम है, जो आपको इस समस्या के समाधान तक ले जाएगा. यदि आप अपनी समस्या को स्वीकार नहीं करेंगे तो और ज़्यादा तनावग्रस्त या दुखी महसूस करेंगे. अपनी परेशानी को पहचानकर उसे स्वीकारना, ख़ुद के साथ सहानुभूति रखना और अपने प्रति आलोचनात्मक रुख़ न रखना ही वह चीज़ें हैं, जो आपके मन से इस बात का बोझ कुछ कम करेंगी.

इन भावनाओं को व्यक्त करें
भावनाओं को व्यक्त करने से हम तनाव मुक्त और हल्का महसूस करते हैं. लेकिन यह कतई ज़रूरी नहीं कि किसी व्यक्ति के सामने ही आप ये भावनाएं व्यक्त करें, आप इसके लिए दूसरे कई माध्यम अपना सकते/सकती हैं, मसलन- भावनाओं को काग़ज़ पर लिखना, डायरी में लिखना, आईने में देखकर ख़ुद से बातें करना या फिर अपने किसी ऐसे करीबी से चर्चा करना जो आपके प्रति आलोचनात्मक न हो.

‘ना’ कहना सीखें
यदि आपको लगता है कि त्यौहारों पर आपसे सभी लोग ज़रूरत से ज़्यादा अपेक्षाएं रखते हैं तो आप लोगों को मना करना सीखें. अपने हाथ में केवल उतने ही काम रखें, जिन्हें आप आसानी से पूरा कर सकते/सकती हों. छुट्टियां और त्यौहार आपके सहज रहने से आपको बेहतर लगेंगे अत: लोगों से मिलने की अपनी सूची को छोटा रखें.

एक्सरसाइज़ ज़रूर करें
यदि आप हॉलिडे ब्लूज़ से बचना चाहते/चाहती हैं तो आपको चाहिए कि आप किसी भी दिन अपने एक्सरसाइज़ रूटीन को बिगड़ने न दें. फिर चाहे आप कहीं बाहर छुट्टियों पर गए हों या फिर घर पर ही त्यौहार मना रहे हों. अवसाद या उदासी के लक्षणों को दूर करने में नियमित एक्सरसाइज़ की गहरी भूमिका होती है. अत: यदि आप छुट्टियों के दौरान जिम न भी जा पाएं तो ध्यान रखें कि सोफ़े या कुर्सी पर उदास बैठे रहने से कहीं बेहतर होगा कि आप कहीं टहल ही आए.

शराब से दूरी बनाएं
यदि आपको हॉलिडे ब्लूज़ की समस्या है तो बहुत ज़रूरी है कि आप शराब न ही पिएं या फिर बेहद कम पिएं. यदि किसी पार्टी में ड्रिंक करने से बच सकते हैं तो ज़रूर बचें, क्योंकि ऐल्कहॉल अवसाद बढ़ाने का काम करता है. यह आपकी भावनात्मक स्थिरता को विचलित करने में भूमिका निभा सकता है.

अपना ध्यान रखें
अपने खानपान को सेहतमंद रखें. ताज़ा फल, सब्ज़ियां अपने भोजन में शामिल करें. अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें अच्छी नींद लें और इसके लिए समय पर सोने जाएं. अपनी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक ज़रूरतों को त्यौहार या छुट्टियों के चलते अनदेखा न करें. अपने प्रति सहृदय रहकर आप इस समस्या को काफ़ी हद तक कम कर सकते/सकती हैं.

बहुत अधिक अपेक्षाएं न रखें
  त्यौहारों पर बहुत ख़ुश होना, ढेर सारी योजनाएं बनाना अच्छा लगता तो लगता है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना भी बहुत  ज़रूरी है कि कहीं इन अपेक्षाओं का बोझ ही आपको दुखी या उदास न कर दे. यह ध्यान रखें की बदलाव ही सच है और बदलाव को स्वीकारना ही समस्याओं को सुलझाने का तरीक़ा है. आप आज से पांच वर्ष पहले जिस तरह से त्यौहार मनाया करते थे, ज़रूरी नहीं कि आज भी वही तरीक़ा अपनाया जाए. आपकी उम्र बढ़ रही है, आपके जीवन में आने वाले लोग भी बदले होंगे, आपकी प्राथमिकताएं भी बदली होंगी, ऐसे में यदि छुट्टियां या त्यौहार मनाने का तरीक़ा भी थोड़ा बदल लिया जाए तो क्या हर्ज है?

मदद लें
यदि आपको लगता है कि हॉलिडे ब्लूज़ के लक्षण आपके नियंत्रण से बाहर जा रहे हैं तो किसी प्रोफ़ेशनल की मदद लेने में ज़रा  भी देर न लगाएं.

         फ़ोटो साभार: फ्रीपिक

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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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