परिंदे: अकेलेपन की परतें उघाड़ती एक लंबी कहानी (लेखक: निर्मल वर्मा)
हर इंसान अपने-अपने हिस्से का अकेलापन भोग रहा होता है. किसी को पाने की तड़प, किसी को पाकर खोने का ...
हर इंसान अपने-अपने हिस्से का अकेलापन भोग रहा होता है. किसी को पाने की तड़प, किसी को पाकर खोने का ...
कई बार दूसरों का भला करने के चक्कर में हम अपना ही घर फूंक बैठते हैं. पंडा गिरजाकुमार की पत्नी ...
क्या होता है, टूरिस्ट की कमी का सामना कर रहे एक हिल स्टेशन पर? एक अदद सैलानी पर सभी के ...
मशीनों के आगमन ने कई कलाओं और कलाकारों को हाशिए पर धकेल दिया. लाख की चूड़ियां बनाने वाले बदलू काका ...
कभी-कभी झूठ बोलना अधिक सुविधाजनक होता है, पर सच तो सच ही होता है. न चाहते हुए भी बाहर आ ...
पुरखों द्वारा लगाए गए बरगद के पेड़ ने जब पंडित सालिकराम का जीना मुश्क़िल कर दिया तो उन्होंने एक ऐसा ...
ग्रामीण परिवेश पर आधारित इस कहानी में नारी स्वभाव और स्वाभिमान का ख़ूबसूरत चित्रण है. गांव की महिलाओं की हंसी-ठिठौली, ...
मज़दूर वर्ग के शोषण और यातना को चित्रित करती ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानी बताती है कि मज़दूरों के लिए इज़्ज़त ...
जब चिट्ठी-पत्री का इतना ज़ोर नहीं हुआ था, तब एक गांव से दूसरे गांव संदेशा पहुंचाने लाने के लिए संवदिया ...
सेठ लगनदास का गोद लिया पुत्र मगनदास आराम की ज़िंदगी गुज़ार रहा था, पर क्या होता है जब उसके दत्तक ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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