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एक कप दही की क़ीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू?

डॉक्टर दीपक आचार्य by डॉक्टर दीपक आचार्य
December 9, 2021
in ज़रूर पढ़ें, डायट, हेल्थ
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एक कप दही की क़ीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू?
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दही गुणों की खान है, यह बात आप भी जानते होंगे. लेकिन वे गुण कौन-से हैं? चलिए इनमें से कुछ हम यहीं बताए देते हैं- यह भोजन का पचना आसान बनाता है, हड्डियां मज़बूत करता है, कमर और जांघों की चर्बी को कम भी करता है. और भी कई ख़ूबियां है दही की, जिनके बारे में आपको बता रहे हैं डॉक्टर दीपक आचार्य.

मेरे घर की रसोई में दही बारह महीने देखने मिल सकता है. अब हम ठहरे दक्षिण भारत के लालन-पालन वाले. नानी के घर में खानपान के दौरान दही सबसे महत्वपूर्ण हुआ करता था. थाली में सबसे आखरी में दही-भात ज़रूर परोसा जाता था. ठंड हो, गर्मी हो या बारिश-तूफ़ान, दही हर मौसम में भोजन का हिस्सा बना रहता और ये सिलसिला अब तक चला आ रहा है. शुरुआत में आनाकानी करने पर मुझे बताया गया कि दही खाओगे तो हड्डियां मज़बूत रहेंगी और खाने को डाइजेस्ट करने में आसानी भी होगी. कुछ समय पहले, मैंने कर्नाटक के शिवमोग्गा में मिलीं 78 वर्षीय हर्बल जानकार महिला माथम्मा के बारे में बात की थी. दही के बारे में उनका अनुभव सुनकर मेरे होश ठिकाने पर नहीं रहे थे. उन्होंने बताया था कि दही जांघों और कमर पर बनी चर्बी को कम करने में मदद करता है, बशर्ते लोग खानपान को संतुलित भी रखें. मेरे होश इसलिए उड़ रखे थे, क्योंकि मैंने दही से जुड़ी कई क्लिनिकल स्टडीज़ पहले से पढ़ रखी थी. मैं हैरान था कि इतनी सटीक जानकारी इन बुज़ुर्ग महिला को बगैर किसी किताबी ज्ञान के कैसे पता थी. और मुझे फिर एक बार भरोसा हो गया कि एक्सपीरियंस हमेशा एक्सपेरिमेंट्स से बड़ा होता है, ये तो परम् सिद्ध है.

जानिए इसका कारण भी
कॉर्टिसोल एक ऐसा हॉर्मोन है जिसके कम प्रोडक्शन से हमारी वेस्टलाइन पर फैट जमने लगता है. दही में पाया जाता है कैल्शियम, यही कैल्शियम कॉर्टिसोल के प्रोडक्शन को ट्रिगर करने का काम करता है. आया समझ? एक कप दही में 49% तक कैल्शियम मिलता है. दही में प्रोटीन भी पाया जाता है. करीब 200 ग्राम दही में 12 ग्राम तक प्रोटीन होना इसे बेहद ख़ास बनाता है. Impact of yogurt on appetite control, energy balance, and body composition टाइटल के साथ छपी एक इस क्लिनिकल स्टडी को पढ़ेंगे तो पाएंगे कि दही का कैल्शियम, प्रोटीन के साथ मिलकर भूख मिटाने या कम करने वाले हॉर्मोन्स जैसे पेप्टाइड YY और GLP-1 को बढ़ा देता है. यानी दही भूख भी मारता है और साथ साथ शरीर के लिए आवश्यक कंपाउंड्स भी देता है, एक तीर, दो निशाने?
अब बात करता हूं माथम्मा द्वारा दी जानकारी पर मेरी हैरानी की. इंटरनैशनल जर्नल ऑफ़ ओबैसिटी (लंदन), 2016 में कुल 13631 आर्टिकल्स को आधार मानकर छपे एक रिव्यू आर्टिकल से जानकारी मिलती है कि हमारी लोअर बॉडी और कमर के फैट को सिकोड़ने या कम करने में दही ख़ूब असर करता है.

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वज़न घटाने की कोशिश कर रहे हैं तो
यदि वज़न सम्हालने की कोशिश कर रहें हैं तो दही कंज़्यूम करना शुरू करें. अच्छी, हेल्दी डाइट लें, सुबह का उगता सूरज देखना शुरू करें, सुबह घूमने निकलें, अड़ोस-पड़ोस से फूल तोड़कर भी ले आएं, वक़्त मिले तो धूप में बैठकर अख़बार पढ़ लें, साथ में चाय की चुस्की भी मारते जाएं और सबसे खास बात… दिन में सोना भूल जाएं. हां, अकेले दही के भरोसे रहकर वजन कम करने की बिल्कुल ना सोचें. डॉक्टर दीपक आचार्य सलाह मानेंगे तो रिज़ल्ट-विज़ल्ट मिल भी जाएंगे, वरना पीते रहें अमका-ढमका टाइप की चाय, जूस और खाते रहिए बेवकूफ़ बनाने वाले कैप्सूल्स . दुनिया का कोई कैप्सूल या टेबलेट या डायट प्लान आपको स्वस्थ रखते हुए फिट नहीं बना सकता, शर्त लगा लीजिए. प्लान्ड डायट बकवास फ़ंडा है, सब कुछ खाएं बस लिमिट में और ख़ुद को ऐक्टिव रखें.
एक बात और, पोस्ट शेयर करें, पर इसके लेखक के क्रेडिट के साथ, ताकि लेख को सम्मान मिले, ये देसी ज्ञान का सम्मान होगा.

नोट: रमेश बाबू ऑफ़ेंडेड फ़ील न करें, बस एक फ़िल्मी डायलॉग है ये, माफ़ी मांग ले रहा पहले से. ग़ुस्सा ना होइएगा, एक कप दही ज़रूर खा लें, स्ट्रेस भी दूर करता है ये.

फ़ोटो: पिन्टरेस्ट, Tarla Dalal

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डॉक्टर दीपक आचार्य

डॉक्टर दीपक आचार्य

डॉक्टर दीपक आचार्य, पेशे से एक साइंटिस्ट और माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं. इन्होंने मेडिसिनल प्लांट्स में पीएचडी और पोस्ट डॉक्टरेट किया है. पिछले 22 सालों से हिंदुस्तान के सुदूर आदिवासी इलाक़ों से आदिवासियों के हर्बल औषधीय ज्ञान को एकत्र कर उसपर वैज्ञानिक नज़रिए से शोध कर रहे हैं.

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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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