इन दिनों सोशल मीडिया के ज़रिए किस तरह लोगों का ध्यान अपने जीवन की बुनियादी ज़रूरतों से इतर धर्म और...
कुछ कविताएं दिल में इस तरह उतर जाती हैं कि किसी संघर्ष का एंथम बन जाती हैं. वर्ष 2012 के...
वर्षों पहले लिखी अदम गोंडवी की छोटी-सी रचना ‘घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है’ आज के सामाजिक...
यूं तो हर संजीदा व्यक्ति अपने आसपास के हालात पर नज़र रखता है, हवाओं में मौजूद संदेशों को पढ़ता है...
हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दो देश रहते हैं. कहानी राजधानी में लेखक...
मां अपने बच्चों के लिए क्या नहीं करती? ख़ासकर जब उसे लगे कि बच्चा कमज़ोर, आवारा और लापरवाह है तो...
मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी ईदगाह, करोड़ों भारतीयों के स्कूली दिनों की सुनहरी यादों में समाई हैं. ग़रीब लड़के हामिद...
सुमित्रानंदन पंत की सबसे ज़्यादा पढ़ी गई कविताओं में एक ‘आ: धरती कितना देती है’ मनुष्य के स्वार्थी और भाग्यवादी...
हमारा दिल भले ही कितना भी सख़्त क्यों न हो जाए, पर शरीर के दूसरे अंगों का संवेनशील होना बताता...
क्या प्रेम का अन्त कहानियों की तरह विवाह में ही होना आवश्यक है? इस सवाल के इर्दगिर्द बुनी गई एक...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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