नैतिक मूल्यों को कहानी की रूपरेखा में प्रस्तुत करनेवाले कहानीकार सुदर्शन की कहानी ‘सच का सौदा’ में सच्चाई की अहमियत...
हम जीवन की आपाधापी में इतने उलझे होते हैं कि उम्र कब बीत जाती है, पता ही नहीं चलता. कुंवर...
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और फ़िलॉसफ़ी में गहरा नाता है. पेशे से इंजीनियर रहे नरेश सक्सेना की कविता ‘पानी क्या कर रहा...
एक महिला अनाथ बच्चे को मज़दूरी करते देख द्रवित हो जाती है. वह उसे घर ले आती है. अपने बेटे...
बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं, चीज़ों को ही नहीं, लोगों के भी क़रीब जाने से पहले उन्हें परख लेना चाहिए, पर आम...
वफ़ा और बेवफ़ाई वो दो चीज़ें हैं, जिनसे उर्दू शायरी को खाद-पानी मिलता है. इन्हीं दोनों के इर्द-गिर्द सिमटी यह...
यह एक कश्मीरी लोककथा है, जिसे रिस्कन बॉन्ड ने अपनी किताब कश्मीरी किस्सागो में संकलित किया है. इस कहानी में...
स्त्रियों का लिखा उनका स्वयं का भोगा गया दुख होता है. क्यों उनकी लिखी पंक्तियों को सीरियसली लेना चाहिए, बता...
एक बीमार अमीर लड़की को देखने शहर से दूर गए एक डॉक्टर की ज़िंदगी का एक दिन काफ़ी रोचक उतार-चढ़ाव...
कहते हैं बुढ़ापा भी एक तरह का बचपना होता है. पिता के चश्मे को माध्यम बनाकर लिखी गई यह कविता...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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