जैसे-जैसे इंसान शिक्षित और सभ्य हुआ उसने बुराई और बेइज़्ज़ती करने की ऐसी कूटभाषा विकसित कर ली, जिसे समझते सब...
किसी भी नागरिक के लिए उसका देश, देश की सुरक्षा सबकुछ होती है. पर क्या होता है, जब देश की...
हालिया रिलीज़ मणिरत्नम की फ़िल्म पीएस-1 यानी पोन्नियिन सेल्वन तमिल में लिखे इसी नाम के उपन्यास का सिनेमाई एडॉप्टेशन है....
एक कवि की दुविधा, कर्तव्य, सीमा और पीड़ा को व्यक्त करती आलोक धन्वा की लंबी रचना ‘जनता का आदमी’ एक...
शिक्षक भले ही एक प्रतिष्ठित पेशा माना जाता हो, पर एक शिक्षक की ज़िंदगी इतनी आसान नहीं होती. मोहन राकेश...
बापू यानी हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके दौर से ही लोग मामू बनाते आए हैं. आज भी बापू का...
आसपास की चीज़ों को अलग नज़रिए से देखना एक कवि की पहचान है. कवि अरुण चन्द्र रॉय बाज़ार, मिट्टी और...
भीड़ की मानसिकता को समझना हो तो जैनेन्द्र की इस कहानी को पढ़ लीजिए. दुनिया में आवारा भीड़ से ज़्यादा...
नि:स्वार्थ भाव से किया हुआ परोपकार कभी व्यर्थ नहीं जाता. ख़ुद तंगहाली से गुज़र रहा एक युवक, एक ग़रीब भिखारी...
आंसू शीर्षक से लिखी गई गुलज़ार साहब की ये तीन कविताएं अपने हर अल्फ़ाज़ के साथ कमाल करती हैं. आंसू...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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