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प्रेमचंद के फटे जूते: हिंदी के लेखकों की स्थिति पर व्यंग्य (लेखक: हरिशंकर परसाई)

व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की पैनी नज़र से भला कौन बच पाया. उन्होंने उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की फ़ोटो में उनके...

Harishankar-Parsai_Vyangya

पहला सफ़ेद बाल: बेवफ़ा बालों पर एक फ़िलॉसफ़िकल चर्चा (लेखक: हरिशंकर परसाई)

बाल सफ़ेद होना एक सहज और अनिवार्य क़ुदरती प्रक्रिया है. फिर भी हम अपना पहला सफ़ेद बाल देखकर डर जाते...

Dushyant-Kumar

इस मोड़ से तुम मुड़ गई फिर राह सूनी हो गई: दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल

जीवन की वास्तविकता से वाक़िफ़ होने के बावजूद सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देती दुष्यंत कुमार की यह ग़ज़ल पढ़िए...

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