अक्सर लोग कहते सुने जाते हैं कि आजकल अच्छे बच्चे मुश्क़िल से मिलते हैं. पर जो अच्छे बच्चे मिलते भी...
कई बार कुछ चीज़ें, बिना कुछ कहे, बहुत कुछ कह जाती हैं. केदारनाथ सिंह की इस कविता में सभा ख़त्म...
पुरखों द्वारा लगाए गए बरगद के पेड़ ने जब पंडित सालिकराम का जीना मुश्क़िल कर दिया तो उन्होंने एक ऐसा...
अपना नेटवर्क हासिल करने के लिए धरती से हज़ारों किलोमीटर दूर घूम रहे सैटेलाइट्स से जुड़ने वाला मोबाइल फ़ोन, कैसे...
ख़बरों में बलात्कार की घटना को सुन और जान कर हम सभी को अखरता है, पर क्या आपने कभी सोचा...
फ़ेमनिज़्म या नारीवाद के बारे में सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी यह है कि यह पुरुष विरोधी अवधारणा है. निवेदिता मेनन की...
ग्रामीण परिवेश पर आधारित इस कहानी में नारी स्वभाव और स्वाभिमान का ख़ूबसूरत चित्रण है. गांव की महिलाओं की हंसी-ठिठौली,...
राजनीति और समाज की विसंगतियों पर तंज करते दुष्यंत कुमार के ग़ज़ल संग्रह साये में धूप के शेर आपको सोचने...
आदर्श रूप से देखें तो पत्रकारिता एक ज़िम्मेदारी और चुनौतीभरा पेशा है. यह चुनौतियां और ज़िम्मेदारियां दोगुनी हो जाती हैं,...
मज़दूर वर्ग के शोषण और यातना को चित्रित करती ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानी बताती है कि मज़दूरों के लिए इज़्ज़त...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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