कवि अखिलेश श्रीवास्तव के कविता संग्रह गेहूं का अस्थि विसर्जन की कविता ‘प्रजा और पूंजी’ किसान और पूंजीवादी बाज़ार के...
जीवन के छोटे-बड़े कामों को बच्चे ठीक से नहीं कर रहे हैं, तसल्ली से नहीं कर रहे, शांति से नहीं...
अपने जीवन का हिस्सा रहे इंसानों और पशु-पक्षियों के बारे में लिखनेवाली महादेवी वर्मा ने इस संस्मरण में अपने ग़रीब...
शहर हमें ज़्यादा से ज़्यादा सुख, सुविधा और आज़ादी के सपने दिखाता है, और बदले में बहुत कुछ छीन लेता...
कुछ एहसास जो हमेशा हमारे मन में बसते हैं, लेकिन पूरे नहीं होते, उनकी चाहत ताउम्र बनी रहती है. और...
केदारनाथ अग्रवाल की कविता ‘बसंती हवा’ अल्हड़ अल्मस्त बसंती हवा की आत्मकथा जैसी है. हवा हूं, हवा, मैं बसंती हवा...
क्या है एक ज़िंदादिल नानी की वह कहानी, जो उसे अक्सर परेशान करती है? पढ़ें, डॉ संगीता झा की कहानी...
एक बेरोज़गार मन को बांचती है लोकप्रिय कवयित्री अनामिका की कविता ‘बेरोज़गार’. किसी कॉलसेंटर के घचर-पचर-सा रतजगा जीवन क्या जाने...
आज़ादी के पहले के साम्प्रदायिक माहौल को बयां करते हुए लिखी गई लेखिका-कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कहानी इंसानियत...
जब आपने अपने रिश्तों को निभाने की सारी कोशिशें कर देखी हों, जब आपने अपनी ओर से हर बदलाव को...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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