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क्या आपको पता है कच्चे और पके आम का यह ख़ास गणित?

डॉक्टर दीपक आचार्य by डॉक्टर दीपक आचार्य
May 16, 2023
in डायट, हेल्थ
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क्या आपको पता है कच्चे और पके आम का यह ख़ास गणित?
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कच्चे हरे आम का स्वाद आपको बेतरह पसंद होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि इनके छिलके भी गुणों की खान हैं? पका आम तो सभी को पसंद होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे डायबिटीज़ वाले भी खा सकते हैं? और हां, पके आम के छिलके खाने से पेट दर्द हो सकता है. आम के इसी तरह के ख़ास गणित को समझा रहे हैं डॉक्टर दीपक आचार्य.

यदि आप भी कच्चे हरे आम के छिलके फेंक देते हैं तो याद रखिए, इन्हें फेंकना नहीं है. कच्चे आमों को साफ धो लीजिए सूखे कपड़े से पोछ लीजिए छिलके उतारकर इसके पल्प का आमचूर, अचार, मुरब्बा बगैरह बना सकते हैं. रही बात इसके छिलकों की तो इसके छिलकों को फेंकने की ग़लती ना कीजिएगा. छिलकों को धूप में 3-4 दिन उलतपुलटकर सुखा दीजिए और इन्हें ग्राइंड करके पाउडर बना लें. इस पाउडर की आधी चम्मच मात्रा हर दिन एक गिलास पानी के साथ पीना सेहत के हिसाब से बेहतरीन नतीजे देता है.

कच्चे आम के छिलकों के फ़ायदे
कच्चे आम के छिलको में एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड मैंजीफेरीन पाया जाता है, छिलकों का 70-80% हिस्सा फ़ाइबर्स होता है और तो और इनमें पॉलीफ़िनॉल्स, कैरेटेनॉइड्स, विटामिन C, विटामिन E और कई अन्य महत्वपूर्ण प्लांट कंपाउंड्स पाए जाते हैं. हार्ट की समस्याओं के लिए इन नेचरल कंपाउंड्स की ज़रूरतों को लेकर ढेर भर रिसर्च पेपर्स पढ़े जा सकते हैं. आपके बालों, स्किन और आंखों के लिए भी ये कंपाउंड्स बड़े काम के हैं. इसके अलावा कच्चे आम के छिलकों में ट्रायटर्पिन और ट्रायटर्पिनॉएड्स पाए जाते हैं जो कि ऐंटीकैंसर और ऐंटीडायबेटिक कंपाउंड्स हैं. इतना सब कुछ है इन छिलकों में फिर भी इन्हें डस्टबिन/ दुष्टबीन का रास्ता दिखा देना मूर्खता है. फेंकिए मत, इन्हें कंज़्यूम कीजिए बाबा.

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अब बात करते हैं पके आमों की
आपको पता है ना आपके दोस्त डॉक्टर दीपकआचार्य स्वघोषित आम राजा हैं. राजगद्दी पर बैठकर टोकरीभर देसी आम पेट में उड़ेल देते हैं राजा बाबू. ख़ैर, मुझे यक़ीन है कि आपके परिवार में कोई डायबेटिक है तो आम के नाम से ही दहशत मची रहती होगी, क्यों? क्योंकि किन्ही डॉक्टर साहब ने बोल रखा है कि आम खाने से शुगर लेवल बढ़ जाएगा, आम डायबिटीज़ के रोगियों के लिए ज़हर है, ऐसा ही कुछ बोला गया ना? अरे दादा, अति करोगे तो सब ज़हर है. आम में बेशक़ नैचरल शुगर होती है और यह नैचरल शुगर बाक़ी अन्य फलों की तुलना में ज़्यादा ही होती है. क़रीब 150 ग्राम आम में 25 ग्राम तक नैचरल शुगर. तो क्या ये किसी डायबेटिक के शुगर लेवल को बढ़ा देगी? कोई रिसर्च नहीं है, कोई प्रमाण नहीं है तो काहे इतना हो हल्ला? अरे साहब, 150 ग्राम पके आम से दिनभर का 70% तक विटामिन C मिल जाता है और रिसर्च बताती है कि विटामिन C और केरेटिनोइड्स (जो पके आम में ख़ूब होते हैं) डायबिटीज़ होने की संभावनाओं को कम कर देते हैं. तो कुल मिलाकर, कवि कहना चाहते हैं कि 150 ग्राम आम का पल्प बगैर चिंता के हर दिन खाया जा सकता है, 150 ग्राम पल्प यानी मध्यम आकार के 4 आम (गुठली और छिलके बगैर). शुगर- वुगर है तो उसे रहने दीजिए, आप आम खाएं, कोई फर्क नहीं पड़ेगा, बिंदास दबाएं.

ये बातें ज़रूर दिमाग़ में डाल लें
◆ आम ख़रीदते समय सूंघकर चेक ना करें, केमिकल्स हो सकते हैं.
◆ आम को इस्तमाल करने से पहले 20 मिनिट तक पानी में डालकर रखें, ऐसिडिटी नहीं करेगा और केमिकल्स वगैरह इसकी स्किन पर हों तो निकल जाएंगे.
◆ पके आम का छिलका नहीं चबाना है वरना पेट दर्द कर सकता है.
◆ आम खाने के बाद आधा कप कच्चा या पका दूध पी लीजिएगा, जल्द पचेगा और गर्म नहीं करेगा.
◆ डायबिटीज़ वालों को आमरस, जूस या शेक नहीं पीना है, इसमें शक्कर डाली जाती है और जूस वैसे भी नहीं लेना चाहिए.
◆ डायबिटीज़ वालों को आम एक दिन में उतना ही खाना जितना बताया, इतने आम खाकर शुगर शूट नहीं करेगा.
◆ डायबेटिक्स लोग आम खाकर रोस्टेड मूंगफली या रोस्टेड चने खाएंगे तो मूंगफली और चने के प्रोटीन शुगर स्पाइक कम करने में मदद करेंगे.
अभी इतना ही, फिर जब जैसा याद आएगा, पंचायत कर लूंगा.

फ़ोटो: पिन्टरेस्ट

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डॉक्टर दीपक आचार्य

डॉक्टर दीपक आचार्य

डॉक्टर दीपक आचार्य, पेशे से एक साइंटिस्ट और माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं. इन्होंने मेडिसिनल प्लांट्स में पीएचडी और पोस्ट डॉक्टरेट किया है. पिछले 22 सालों से हिंदुस्तान के सुदूर आदिवासी इलाक़ों से आदिवासियों के हर्बल औषधीय ज्ञान को एकत्र कर उसपर वैज्ञानिक नज़रिए से शोध कर रहे हैं.

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