तब तुम क्या करोगे: ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता
महानगरों में रहनेवालों के लिए जातिप्रथा भले ही बीते कल की बात लगे, पर हमारे गांवों के सिलैबस में जातिवाद ...
महानगरों में रहनेवालों के लिए जातिप्रथा भले ही बीते कल की बात लगे, पर हमारे गांवों के सिलैबस में जातिवाद ...
शब्द बेहद ताक़तवर और ईमानदार होते हैं. बस उनके इस्तेमाल का तरीक़ा और सलीका हमें आना चाहिए. ‘शब्द झूठ नहीं ...
उदासी में एक संवेदना होती है. यह संवेदना बनी रहनी चाहिए, पर कुछ लोग आपसे आपकी उदासी छीन लेना चाहते ...
दलित-पिछड़े समाज पर अत्याचार की ख़बरें जब-तब हमारे लोकतांत्रिक देश में सुनाई-दिखाई पड़ जाती हैं. दलित चेतना की मुखर आवाज़ ...
दलित वेदना और चेतना के सबसे प्रमुख साहित्यक हस्ताक्षरों में एक ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता ‘उन्हें डर है’ तेज़ी से ...
सदियों तक समाज से दूर रही आबादी को आज़ादी के बाद एकबारगी सभी के साथ, उसी रफ़्तार से चलने के ...
कविता लिखना और फसल उगाना दोनों सिद्धांत की बात है, ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता सिद्धांत और ढोंग के बीच का ...
छोटी कविताएं अक्सर सोचने के लिए बड़ा कैनवास दे जाती हैं. जब कविता ओमप्रकाश वाल्मीकि की हो तो यह कैनवास ...
हिंदी में दलित लेखन का एक बड़ा नाम ओमप्रकाश वाल्मीकि अपनी रचनाओं में जातीय अपमान और उत्पीड़न का जीवंत चित्र ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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