परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता: बशीर बद्र की ग़ज़ल
बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं, चीज़ों को ही नहीं, लोगों के भी क़रीब जाने से पहले उन्हें परख लेना चाहिए, पर आम ...
बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं, चीज़ों को ही नहीं, लोगों के भी क़रीब जाने से पहले उन्हें परख लेना चाहिए, पर आम ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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