कपड़े के जूते: आलोक धन्वा की कविता
धरती के आकार लेने के इतिहास, इंसानी सभ्यता की तारीख़ों और जूते के बीच क्या संबंध है? काफ़ी तफ़सील से ...
धरती के आकार लेने के इतिहास, इंसानी सभ्यता की तारीख़ों और जूते के बीच क्या संबंध है? काफ़ी तफ़सील से ...
क्रांतिकारी कवि अवतार सिंह ‘पाश’ की कविताएं समाज की सोई हुई सामूहिक चेतना पर वार करती थीं. उनके एक-एक शब्द ...
भारतीय काव्य जगत में विरह की कविताओं की अपनी एक विशेष जगह है. कवि कुंवर बेचैन की कविता ‘उतनी दूर ...
कहते हैं मनुष्य ईश्वर की सबसे ख़ूबसूरत रचना है और मनुष्यों में भी स्त्री उसकी रचनात्मकता का सर्वोच्च उदाहरण है. ...
अमेरिकी रक्षा विभाग में वरिष्ठ अभियंता हरीबाबू बिन्दल एक आला कवि भी हैं. अमेरिकी निवासी भारतीय रचनाकारों के काव्य संकलन ...
एक औरत की परिभाषा बता रही हैं 12 साल की शिविका कुमार. इसे आप कविता कह सकते हैं या समाज ...
‘इन बूढ़े पहाड़ों पर, कुछ भी तो नहीं बदला’ गुलज़ार साहब का लिखा ग़ैरफ़िल्मी गीत है, जिसमें बीच-बीच में उनकी ...
पत्रकार-कवि सुनील कुमार की यह कविता वैसे तो है बड़ी ही छोटी सी, पर इसके मायने बहुत बड़े हैं. क्यों ...
जितनी तक़लीफ़ें, यातनाएं एक वृक्ष को सहनी पड़ती हैं, उतनी हम मनुष्यों को नहीं. फिर भी वृक्ष के बीज हमेशा ...
भूख के सामने दुनियाभर के शबाब का कोई मोल नहीं होता, बता रही है अदम गोंडवी यह कविता. ज़ुल्फ़-अंगड़ाई-तबस्सुम-चांद-आईना-गुलाब भुखमरी ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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