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बेजा नैतिकता के चंगुल से आज़ाद, आज की कहानी है- मेरी मम्मी की लव स्टोरी

शिल्पा शर्मा by शिल्पा शर्मा
February 15, 2023
in बुक क्लब, समीक्षा
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बेजा नैतिकता के चंगुल से आज़ाद, आज की कहानी है- मेरी मम्मी की लव स्टोरी
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इस उपन्यास को पढ़ते हुए आप पहाड़ी धीरज के उन क़िरदारों से मिलते हैं, जो अपराध करते हैं, जेल जाते हैं और धमकाना, गालियां देना तो जिनकी रोज़मर्रा की अदाओं में शामिल है. वे पुलिस से नहीं डरते और पैसा तो जैसे उनका ईमान है, फिर वह चाहे जहां से आए. यह उपन्यास आपको थोड़े ही समय में एक नई दुनिया से रूबरू करा लाता है. तेज़ गति से चलने वाले, दिलचस्प, नए अंदाज़ में लिखे गए, आपराधिक पृष्ठभूमि की प्रेम कहानी वाले इस उपन्यास को पढ़ना तो बनता है!

पुस्तक: मेरी मम्मी की लव स्टोरी
विधा: उपन्यास
लेखिका: जयंती रंगनाथन
प्रकाशक: प्रतिबिंब, नोशन प्रेस का उपक्रम
मूल्य: रु 222/-
उपलब्ध: ऐमाज़ॉन

अपनी मम्मी की लव स्टोरी सुनाना आज भी किसी भी बच्चे के लिए आसान नहीं होता, इस लिहाज से इस उपन्यास का नाम ही दिलचस्पी जगाने में कामयाब हो जाता है. यह उपन्यास एक 18 बरस की तरुणी की ज़ुबानी अपनी मम्मी की रोचक, रोलरकोस्टर राइड वाली प्रेम कहानी बताने के साथ-साथ आपको एक ऐसे परिवार से मिलाता है, जहां अपराध करना या जेल जाना कोई परेशानी की, शर्मिंदगी की या बड़ी बात नहीं है.

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उपन्यास पढ़ते हुए आप शीना की मम्मी रोमा, उसकी दबंग नानी निर्मल और नानी की उसके जितनी ही दबंग दोस्त-कम-दुश्मन विम्मो जैसे क़िरदारों से मिलते हैं. ये पहाड़ी धीरज के वो क़िरदार हैं, जो अपराध करते हैं, जेल जाते हैं और धमकाना, गालियां देना तो जिनकी रोज़मर्रा की अदाओं में शामिल है. वे पुलिस से नहीं डरते और पैसा तो जैसे उनका ईमान है, फिर वह चाहे जहां से आए.

शीना की बातों, शिकायतों और बड़े होने के क्रम से रूबरू होते आप इस उपन्यास में उसकी मां रोमा की उस प्रेम कहानी के साक्षी बनते हैं, जो अपराध जगत से जुड़ती है. शीना को धीरे-धीरे समझ में तो आता है कि मेरी नानी और मां जिस रास्ते पर चले हैं, वो ग़लत है, पर बावजूद इसके अपनी मां की प्रेम कहानी को देखते, जीते हुए बड़ी हो रही शीना को अपनी मां के प्यार करने से कोई शिकायत नहीं है. बल्कि उसे तो अपनी प्रेम डूबी मां, अपने दूसरे पिता कंवल की यादों में खोई मां और उसकी बातें करती मां बहुत सुंदर लगती है. और वह यह भी सोचती है कि जीवन में यदि कभी वह प्यार करेगी तो अपनी मां की तरह.

इस उपन्यास की ख़ासियत ये है कि बेजा नैतिकता से परे, बिना लाग-लपेट के यह आपको तेज़ गति से, लगभग दो ढाई घंटे के भीतर (यदि आप औसत गति से पढ़ते हैं तो) एक नई दुनिया से रूबरू करा लाता है. इसे पढ़ते हुए कथानक इतनी तेज़ी से आगे बढ़ता है कि आपको कुछ और सोचने का कोई मौक़ा नहीं मिलता. आप इसकी दुनिया में डूब कर जल्द से जल्द यह जान लेना चाहते हैं कि आख़िर शीना की मम्मी की लव स्टोरी का अंत कैसा हुआ. तेज़ गति से चलने वाले, दिलचस्प अंदाज़ में लिखे गए, आपराधिक पृष्ठभूमि की प्रेम कहानी वाले इस उपन्यास को एक बार पढ़ना तो बनता है!

 

 

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शिल्पा शर्मा

शिल्पा शर्मा

पत्रकारिता का लंबा, सघन अनुभव, जिसमें से अधिकांशत: महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर कामकाज. उनके खाते में कविताओं से जुड़े पुरस्कार और कहानियों से जुड़ी पहचान भी शामिल है. ओए अफ़लातून की नींव का रखा जाना उनके विज्ञान में पोस्ट ग्रैजुएशन, पत्रकारिता के अनुभव, दोस्तों के साथ और संवेदनशील मन का अमैल्गमेशन है.

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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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