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ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब कविताएं

पुरखे: रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ की कविता

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
February 17, 2023
in कविताएं, बुक क्लब
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Ramashankar-Yadav-Vidrohi_Kavita
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एक कवि की इतिहास दृष्टि तमाम भटकावों के बावजूद कितनी टू द पॉइंट हो सकती है, रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ की कविता पुरखे को पढ़कर आप ख़ुद समझ जाएंगे. कवि ने कविता के रास्ते, मानव जाति के पुरखों के पदचिन्ह तलाशने की कोशिश की है.

नदी किनारे, सागर तीरे,
पर्वत-पर्वत घाटी-घाटी,
बना बावला सूंघ रहा हूं,
मैं अपने पुरखों की माटी

सिंधु, जहां सैंधव टापों के,
गहरे बहुत निशान बने थे,
हाय खुरों से कौन कटा था,
बाबा मेरे किसान बने थे

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September 23, 2025

ग्रीक बसाया, मिस्र बसाया,
दिया मर्तबा इटली को,
मगध बसा था लौह के ऊपर,
मरे पुरनिया खानों में

कहां हड़प्पा, कहां सवाना,
कहां वोल्गा, मिसीसिपी,
मरी टेम्स में डूब औरतें,
भूखी, प्यासी, लदी-फदी

वहां कापुआ के महलों के,
नीचे ख़ून ग़ुलामों के,
बहती है एक धार लहू की,
अरबी तेल खदानों में

कज्जाकों की बहुत लड़कियां,
भाग गईं मंगोलों पे,
डूबा चाइना यांगटिसी में,
लटका हुआ दिवालों से

पत्थर ढोता रहा पीठ पे,
तिब्बत दलाई लामा का,
वियतनाम में रेड इंडियन,
बम बंधवाएं पेटों पे

विश्वपयुद्ध आस्ट्रिया का कुत्ता,
जाकर मरा सर्बिया में,
याद है बसना उन सर्बों का
डेन्यूब नदी के तीरे पे,
रही रौंदती रोमन फौजें
सदियों जिनके सीनों को

डूबी आबादी शहंशाह के एक
ताज के मोती में,
किस्से कहती रही पुरखिनें,
अनुपम राजकुमारी की

धंसी लश्क रें, गाएं, भैंसें,
भेड़ बकरियां दलदल में,
कौन लिखेगा इब्नबतूता
या फिरदौसी ग़ज़लों में

ख़ून न सूखा कशाघात का,
घाव न पूजा कोरों का,
अरे वाह रे ब्यूसीफेलस,
चेतक बेदुल घोड़ों का

जुल्म न होता, जलन न होती,
जोत न जगती, क्रांति न होती,
बिना क्रांति के खुले खजाना,
कहीं कभी भी शांति न होती

Illustration: Pinterest

Tags: Aaj ki KavitaHindi KavitaHindi PoemKavitaKavita PurkheRamashankar Yadav ‘Vidrohi’Ramashankar Yadav ‘Vidrohi’ Poetryआज की कविताकवितारमाशंकर यादव ‘विद्रोही’हिंदी कविता
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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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