नमक कहने को तो एक आम-सी चीज़ है, पर उसकी व्यापकता इस आम-सी चीज़ को ख़ास बनाने के लिए काफ़ी...
रामायण का प्रसंग लेते हुए हरिशंकर परसाई ने आज़ाद भारत की राजनीति पर करारा व्यंग्य किया है. यह प्रसंग आज...
देश के बच्चों को थोड़ा संभलकर चलने की सलाह देती राजेश जोशी की कविता ‘रुको बच्चों’ देश के कथित तारणहारों...
बातचीत करती हुई शैली में कहानियां लिखना इस्मत चुग़ताई की ख़ासियत थी. इश्क़ में पागल लोगों के लिए लिखी उनकी...
बड़े-बड़े शहरों में आधुनिक सभ्यता के नये रंग-ढंग, छल-कपट के साधन भी बन गए हैं. इस कहानी का नायक उसी...
प्रेम एक ऐसी शै है कि जिसे जितना जानो, उतना कम है. लेखक-कवि दिलीप कुमार बता रहे हैं कि कैसे...
दलित कौन हैं? भारत के इतिहास में उनकी जगह कहां है? उनकी कथा और व्यथा क्या है? इन सवालों का...
आज स्वतंत्रता दिवस है और स्वतंत्रता को बरक़रार रखने में हमारे देश के सिपाहियों और जवानों के योगदान को कौन...
जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब मौन का रास्ता खुला हुआ मिलता है. दुनिया की सबसे सशक्त भाषा...
बचपन के दोस्तों के साथ जुड़ी होती है, बचपन की मस्तमौला यादें, नटखट शरारतें और मसालेदार सच्चे-झूठे क़िस्सों की पोटली....
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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