छोटे बच्चे की मनोहारी मुस्कान से सुंदर और सुकूनदायक और क्या हो सकता है? बाबा नागार्जुन की कविता यह दंतुरित...
ऐसे मसले, जिनमें न्याय कर पाना कठिन है, ये जज दूध का दूध और पानी का पानी कर देते थे....
किताबघर प्रकाशन से आए कवयित्री नीलेश रघुवंशी के कविता संग्रह ‘खिड़की खुलने के बाद’ से ली गई यह कविता मुहावरे...
बोधि प्रकाशन से हाल ही में आए अमृता सिन्हा के कविता संग्रह काल के करघे पर आखरों की कताई से...
वक़्त का चूल्हा जलते रहने के लिए ईंधन मांगता है. गुलज़ार साहब की कविता ईंधन उपलों की टेक लेकर बचपन...
मृत्युलोक में भोलाराम नामक इंसान का जीव लेने गया यमदूत पांच दिनों से लापता है. जब वह लौटता भी है...
जीवन में हम ख़ुद न की गई ग़लतियों का बोझ भी ढोते हैं और ख़ुद की गई ग़लतियों का बोझ...
सदियों तक समाज से दूर रही आबादी को आज़ादी के बाद एकबारगी सभी के साथ, उसी रफ़्तार से चलने के...
चाहे पेंच कसना हो या बातचीत, उसके साथ सहज रहना ज़रूरी है. पेंच को बेवजह कसने से उसकी चूड़ी मर...
कई बार दूसरों का भला करने के चक्कर में हम अपना ही घर फूंक बैठते हैं. पंडा गिरजाकुमार की पत्नी...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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