आज के भारत में महात्मा गांधी (बापू) की तलाश कर रही है हूबनाथ पांडे की कविता ‘बापू’. मैं जब तक...
आरती एक सख़्त और सफल सरकारी ऑफ़िसर है. उसके पास सबकुछ है, पर ऐसा क्या होता है कि पति भजन...
धरती हमें इतना कुछ देती है, क्या हमें भी इसे कुछ नहीं देना चाहिए? बता रही है हूबनाथ पांडे की...
जब शाम पकी हुई हो, सबकुछ गड़बड़झाल हो, आपके मन की एक न सुनी जा रही हो तो क्या किया...
बिंदा लेखिका महादेवी वर्मा के बचपन की सखी थी. सौतेली मां द्वारा बात-बेबात सज़ा पानेवाली बिंदा एक दिन हमेशा-हमेशा के...
‘बुलाती है मगर जाने का नहीं’ दिवंगत शायर राहत इंदौरी की मशहूर ग़ज़लों में एक है. यह ग़ज़ल दुनियादारी की...
बचपन की प्यारी सहेली, जो किशोरवय होते-होते अपने प्रेमी संग भाग गई. जिससे न चाहते हुए, हिचकते हुए मिलना भी...
हम एक प्रतियोगी समय में रह रहे हैं. बचपन से ही अपने बच्चों को सबसे आगे देखने की हमारी इच्छा...
मरहूम गीतकार-कवि गोपालदास नीरस की दार्शनिकता उनकी लंबी कविता कारवां गुज़र गया में महसूस की जा सकती है. स्वप्न झरे...
पति की मौत के बाद पूरी तरह बिखरी मणी कैसे संभालती है ख़ुद को. हिंदी माह की नई कहानियों की...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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