मटर छीलते हुए: अरुण चन्द्र रॉय की कविता
जब हम कोई काम कर रहे होते हैं, तब हम केवल वही काम नहीं कर रहे होते हैं. गृहणियां मटर ...
जब हम कोई काम कर रहे होते हैं, तब हम केवल वही काम नहीं कर रहे होते हैं. गृहणियां मटर ...
प्रकृति के शांत विद्रोह-विरोध को शब्द देती हुई चेतन कुम्हारी यह छोटी-सी कविता विकास की क़ीमत चुका रहे दुनियाभर के ...
हर दार्शनिक कहता रहा है कि हमें अपने अंदर के बच्चे को ज़िंदा रखना चाहिए. कवि राहुल राजेंद्र खंडालकर की ...
अपने संवेदना, करुणा और जीवन के फ़लसफ़े से भरे सैकड़ों गीतों को धरोहर के तौर पर हमें दे गए गीतकार ...
बरसात के मौसम में पहाड़ों की ख़ूबसूरती देखते बनती है. वर्षा ऋतु में पर्वतीय प्रदेश के अनुपम सौंदर्य का वर्णन ...
चंद्रकांत देवताले की यह कविता सभ्यता के विकास की ख़तरनाक दिशा की ओर इशारा करती है. मां के समय जो ...
बचपन अपने रास्ते तलाश लेता है. हर हाल में ख़ुशियों के लम्हे जुगाड़ लेता है. आलोक धन्वा की यह छोटी-सी ...
प्रेम के प्रतीक ताजमहल की ख़ूबसूरती पर जितनी कविताएं लिखी गई हैं, शायरों की कलम उतनी ही प्रेम के महंगे ...
यूं तो हमारी ज़िंदगी हमसे अलग नहीं है. पर कभी ख़ुद को ज़िंदगी से कुछ क़दम दूर रखकर उससे बातचीत ...
पाकिस्तान के मशहूर शायर हबीब जालिब की पंक्तियां ‘तुम से पहले जो इक शख़्स यहां तख़्त-नशीं था, उस को भी ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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