ग्रीन कार्ड: डॉ संगीता झा की कहानी
एक अपराजिता कैसे समय के साथ समाज से हार मान लेती है? कैसे आज भी एक पढ़ी-लिखी और आज़ाद ख़्याल ...
एक अपराजिता कैसे समय के साथ समाज से हार मान लेती है? कैसे आज भी एक पढ़ी-लिखी और आज़ाद ख़्याल ...
संस्मरण लिखने में लेखिका महादेवी वर्मा का कोई सानी नहीं था. प्रस्तुत संस्मरण ‘रामा’ में उन्होंने अपने घर के नौकर ...
देवी पूजा के अलग-अलग तरीक़ों के बीच कई बार पुरानी और नई सोच का टकराव हो ही जाता है, लेकिन ...
ज़िंदगी कब, किस मोड़ पर ला खड़ा करेगी, हममें से कोई नहीं जानता. इस कथा का नायक मयंक गहरे दुखों, ...
कहानियां भी अपने किरदारों के कुछ पैमाने तय करती हैं, उर्दू में लिखनेवाले कहानीकार कृष्ण चंदर ने कालू भंगी नामक ...
एक तवायफ़ की बेटी गुलबदन के गुलाबबाई और फिर वेश्या गुलबदन बनने की कहानी. पहले एक राजा ने उसकी ज़िंदगी ...
आरती एक सख़्त और सफल सरकारी ऑफ़िसर है. उसके पास सबकुछ है, पर ऐसा क्या होता है कि पति भजन ...
जब शाम पकी हुई हो, सबकुछ गड़बड़झाल हो, आपके मन की एक न सुनी जा रही हो तो क्या किया ...
बिंदा लेखिका महादेवी वर्मा के बचपन की सखी थी. सौतेली मां द्वारा बात-बेबात सज़ा पानेवाली बिंदा एक दिन हमेशा-हमेशा के ...
बचपन की प्यारी सहेली, जो किशोरवय होते-होते अपने प्रेमी संग भाग गई. जिससे न चाहते हुए, हिचकते हुए मिलना भी ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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