ये उत्सव, ये महोत्सव: किसका, किसके लिए, क्यों और कब तक?
अभी-अभी हम सभी देश की आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाकर फ्री हुए हैं. वैसे तो भारत देश में तीज-त्यौहारों की ...
अभी-अभी हम सभी देश की आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाकर फ्री हुए हैं. वैसे तो भारत देश में तीज-त्यौहारों की ...
दुनिया एक बाज़ार है. यहां हर चीज़ की क़ीमत चुकानी होती है. आज हम देश की आज़ादी का अमृत महोत्सव ...
भारत ही नहीं, विश्व सिनेमा में ऐसी फ़िल्मों की संख्या कम नहीं है, जो अपने रिलीज़ के वक़्त न तो ...
जब आपको सारी दुनिया एक जैसी लगने लगे, सारे लोगों की शक्लें एक जैसी दिखने लगे इसका मतलब कुछ नया ...
वर्ष 2019 में अनुभव सिन्हा की फ़िल्म आर्टिकल 15 दुनियाभर में चर्चा की विषय रही. यह फ़िल्म इक्कीसवीं सदी वाले ...
कबीर हों, रैदास या नानक… सभी ने अपने अंदर झांकने, ख़ुद को पहचानने और अपने अंदर बैठे ख़ुदा को खोजने ...
भारत में खेती किसानी अमूमन घाटे का सौदा है. यह आप देशभर में ज़्यादातर किसानों की बदहाली से समझ सकते ...
हमारे यहां दस्तूर है कि किसी के जन्मदिन या ख़ास दिन पर उसके बारे में बात की जाए. आज हम ...
क्या होता है, जब लंबे समय तक शहर में रहने के बाद एक दिन आप गांव जाते हैं? क्या गांव ...
भारत में यादें, जल्दी पुरानी हो जाती हैं. यहां तक कि हम अपना भोगा दुख तक भूल जाते हैं. जय ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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