तमन्ना फिर मचल जाए: जावेद अख़्तर की कविता
प्यार, प्यार की यादें और प्यार करनेवाले सारी दुनियादारी भुला देते हैं. ‘तमन्ना फिर मचल जाए’ जावेद अख़्तर की यह ...
प्यार, प्यार की यादें और प्यार करनेवाले सारी दुनियादारी भुला देते हैं. ‘तमन्ना फिर मचल जाए’ जावेद अख़्तर की यह ...
बिना बोले बर्फ़ बहुत कुछ कहती है, पर उसे समझने के लिए एक कवि हृदय चाहिए. संवेदनशील कवि अरुण चन्द्र ...
आम आदमी की ज़िंदगी से जुड़े सवालों पर संसद की चुप्पी को कम से कम शब्दों में बयां करती है ...
स्कूली दिनों में पढ़ी यह कविता बताती है कि भले ही तलवार से लोगों को डराकर शांत किया जा सकता ...
जीवन हर पल किया जानेवाला संघर्ष है. केदारनाथ अग्रवाल की यह कविता ज़िंदा आदमी के संघर्ष को बयां करती है. ...
सुरक्षा अपने साथ एक डर भी ले आती है, जो अवसाद बन जाता है. जंगली फूलों और लॉन के फूलों ...
उर्दू की कई ग़ज़लें महबूबा की नई तस्वीर पेश करती हैं. जॉन एलिया की रचना ‘तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत ...
ग़ुलाम अली की आवाज़ में आपने भी यह ग़ज़ल सुनी होगी. बीते समय की तलाश पर ले चलती गुलज़ार साहब ...
प्रिय के विरह में दुखी प्रेमिका अपने प्रेमी के आगमन की कामना करती है. वह उसके संभावित आगमन पर उसके ...
जहां घरों में खिड़की रौशनी और हवा की आवाजाही के लिए लिए ज़रूरी है, वहीं जीवन में खिड़की उम्मीदों को ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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