तू किसी रेल-सी गुज़रती है: दुष्यंत कुमार की कविता
दुष्यंत कुमार की मशहूर ग़ज़ल ‘मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूं’ की पंक्तियां ‘तू किसी रेल-सी गुज़रती है, मैं किसी पुल-सा ...
दुष्यंत कुमार की मशहूर ग़ज़ल ‘मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूं’ की पंक्तियां ‘तू किसी रेल-सी गुज़रती है, मैं किसी पुल-सा ...
घर होने और न होने के क्या मायने होते हैं? घर शीर्षक से लिखी अज्ञेय की इन पांच कविताओं को ...
अगर आप शक्तिशाली हैं तो दूसरों के अधिकारों को न छीनें, उनकी दुनिया में अतिक्रमण न करें. सूरज को शक्ति ...
जैसे-जैसे इंसान शिक्षित और सभ्य हुआ उसने बुराई और बेइज़्ज़ती करने की ऐसी कूटभाषा विकसित कर ली, जिसे समझते सब ...
बापू यानी हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके दौर से ही लोग मामू बनाते आए हैं. आज भी बापू का ...
आसपास की चीज़ों को अलग नज़रिए से देखना एक कवि की पहचान है. कवि अरुण चन्द्र रॉय बाज़ार, मिट्टी और ...
आंसू शीर्षक से लिखी गई गुलज़ार साहब की ये तीन कविताएं अपने हर अल्फ़ाज़ के साथ कमाल करती हैं. आंसू ...
नारी को शक्ति और देवी कहा जाता है. पर मुंह से देवी कह देने भर से क्या हम उन्हें सही ...
अज्ञेय की सबसे ज़्यादा कोट की जानेवाली लघु कविताओं में प्रमुख है ‘सांप’. कविता में सांप को माध्यम बनाकर अज्ञेय ...
‘तुम से पहले जो इक शख़्स यहां तख़्त-नशीं था, उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था’ ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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