लोहे ने कब कहा: कुंवर बेचैन की कविता
अपने अंदर आए बदलावों का दोष दूसरों पर मढ़नेवालों को आईना दिखाती है, कुंवर बेचैन की कविता ‘लोहे ने कब ...
अपने अंदर आए बदलावों का दोष दूसरों पर मढ़नेवालों को आईना दिखाती है, कुंवर बेचैन की कविता ‘लोहे ने कब ...
एक औरत के जितना सामंजस्य बिठाकर भला और कौन चल सकता है. अपने पहले राजकीय प्रवास पर गई औरत के ...
सतत चलती रहनेवाली, बहती रहनेवाली नदी भी सुस्ताना चाहती है. बिल्कुल एक कविता की तरह. गुलज़ार साहब की कविता ‘एक ...
महिला वेदना और मुद्दों को आवाज़ देनेवाली कवयित्री निर्मला पुतुल उस पुरुषवादी समाज से सवाल कर रही हैं, जिसका मानना ...
‘खांटी घरेलू औरत’ लेखिका-कवयित्री ममता कालिया की गृहणियों के लिए समर्पित कविताओं की श्रृंखला है. आम महिलाओं-गृणियों की ज़िंदगी आम ...
ताजमहल, जिसे विश्व के सात आश्चर्यों में एक माना जाता है, जिसे भारत के गौरव से जोड़कर देखा जाता है, ...
मैथिलीशरण गुप्त के प्रसिद्ध महाकाव्य ‘यशोधरा’ की कविता ‘सखि वे मुझसे कह कर जाते’ की अगली कड़ी है कविता ‘एकांत ...
रामधारी सिंह दिनकर का महाकाव्य रश्मिरथी महाभारत का काव्यांतरण है. इस महाकाव्य के कई खंडों में कृष्ण की चेतावनी काफ़ी ...
मौजूदा आदिवासी साहित्य का जाना-माना चेहरा वंदना टेटे की यह कविता आदिवासी जीवन की ख़ूबसूरती का बखान करती है. प्रकृति ...
ज्ञान प्राप्ति के लिए रात के अंधेरे में घर-परिवार त्याग देनेवाले युवराज सिद्धार्थ की शोकाकुल पत्नी यशोधरा अपने मन की ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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