धुआं: नफ़रत के बीच उम्मीद की कहानी (लेखक: गुलज़ार)
महजबों के बीच नफ़रत की भावना ने किस क़दर घर कर लिया है कि एक मरे हुए आदमी की आख़िरी ...
महजबों के बीच नफ़रत की भावना ने किस क़दर घर कर लिया है कि एक मरे हुए आदमी की आख़िरी ...
गुलकी को उसके पति ने छोड़ दिया है. उसके माता-पिता का देहांत हो गया है. वह मायके के घर आ ...
अकाल के बाद एक गांव की डरावनी हक़ीक़त बताती धर्मवीर भारती की यथार्थवादी रचना ‘मुर्दों का गांव’. यह कुछ-कुछ ज़ॉम्बीज़ ...
मणिया घर का नौकर है. भोला भाला मणिया नए मालिक के घर में ख़ुशी-ख़ुशी रहता है. घर के लोग भी ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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