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ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब क्लासिक कहानियां

परिसर: ऋतुराज की कविता

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
July 5, 2023
in क्लासिक कहानियां, बुक क्लब
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Rituraj_Kavita
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सुरक्षा अपने साथ एक डर भी ले आती है, जो अवसाद बन जाता है. जंगली फूलों और लॉन के फूलों के बीच की बातचीत जीवन के इस फ़लसफ़े को बयां करती है.

जंगली फूलों ने लॉन के फूलों से
पूछा, बताओ क्या दुःख है
क्यों सूखे जा रहे हो
दिन प्रतिदिन मरे जा रहे हो!!

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September 18, 2025

पीले, लाल, जामुनी, सफेद, नीले
पचंरगे फूल बड़ी शान से
बिना पानी सड़क के किनारे
सूखे में खिल रहे थे
हर आते-जाते से बतिया रहे थे
डरते नहीं थे सर्र से निकलते
सांप से
ड्रोंगो के पतंगे को झपटने से
किंगफिशर की घोंसला बनाने की
तैयारी की चीख से

ख़ुश थे कि शिरीष पर,
बुलबुलें एक दूसरे को ख़बरें सुना रही हैं
कि पीपल में ढेरों गोल लगे हैं
पूंछ-उठौनी पानी में डुबकी लगा रही है
मैनाएं मुंह में तिनके दबाए
अकड़ कर चल रही हैं

जंगली फूल ख़ुश थे
कि गुलदस्ते में नहीं लगाए जाएंगे
धूप के तमतमाने पर भी इतराएंगे
जबकि सुंदर से सुंदर भी
पिघलने कुम्हलाने से नहीं बचेगा
वे जीने का उत्सव मनाते रहेंगे

इसी तरह हंसेंगे
लॉन पर बैठे बौद्धिकों की बातों पर
बातों से अघाए फूलों पर
ताड़ के रुआंसे पत्तों पर
और उन गुलाबों पर जो इतनी जल्दी
खिलने से पहले बिखर गए

वे मोगरे जो रात में चुपचाप
धरती की सेज महका कर दिवंगत हो गए
वे फूल जो आजीवन प्यासे रहे
और मर गए
काश, जंगल में उगे होते
काश, वे आदिवास की जिजीविषा में
हर दुःख, कष्ट, विपन्नता में
प्रस्फुटित हुए होते

वे जान पाते निर्बंध जीवन का उल्लास
मना पाते कारावास की दीवारों से
बाहर रंगोत्सव
काश! काश!!

Illustration: Pinterest

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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
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