• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home ज़रूर पढ़ें

ओपन लेटर जेन ज़ी के नाम

शिल्पा शर्मा by शिल्पा शर्मा
July 31, 2026
in ज़रूर पढ़ें, नज़रिया, सुर्ख़ियों में
A A
gen-z
Share on FacebookShare on Twitter

शुरुआत जेन एक्स से कर रही हूं, थोड़ा झेल लेना ब्रो!

डियर जेन ज़ी,

हम, जो जेन एक्स के हैं और तुम्हारे पैरेंट्स हैं, उनमें से मुझे ये मान लेने से मुझे गुरेज़ नहीं है कि हम तुम्हारे जितने बेबाक, सशक्त, विद्रोही और ज़िद के पक्के नहीं थे। दरअसल, हमारी परवरिश करने वाले हमारे पैरेंट्स ने दुनिया, समाज और संस्कारों की बेड़ियों के साथ हमें बड़ा किया। और इन बेड़ियों में मौजूद ख़ामियों की ओर ध्यान दिलाने और उसे ठीक करने के लिए हमने उनसे सवाल तो पूछे, पर हर बार उतनी शिद्दत से नहीं पूछे, जैसे कि पूछने चाहिए थे। लेकिन तुमने हमसे हर बार वो सवाल पूछे और पूरी शिद्दत से पूछे, खुलकर पूछे।

इन्हें भीपढ़ें

किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

June 25, 2026
Kul_Devta_Ka_Chunaav

कुलदेवता का चुनाव: भावना प्रकाश की व्यंग्य कथा

May 25, 2026
नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026
माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026

हम जेन एक्स वालों ने बहुत बदलाव देखे, फ़ोन, टीवी, कम्प्यूटर, Y2K, डेस्कटॉप पेजर, मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप, स्मार्ट फ़ोन वगैरह और सबके साथ सामंजस्य बिठाया। हमारे पैरेंट्स ने हमें पढ़ाया-लिखाया भी। हमारी जनरेशन की महिलाओं ने ख़ुद को नौकरीपेशा बनाकर, घर भी संभालकर ये प्रूव किया कि महिलाओं को अवसर मिलें तो वो सब कुछ कर सकती हैं।

जब हम पैरेंट्स बने और तुम जेन ज़ी वाले इस दुनिया में आए तो हमने पाया कि तुम्हारे क्यों, क्या, कैसे– जैसे सवाल उसकी तुलना में कहीं ज़्यादा मज़बूत थे, जब हम बच्चे थे और अपने पैरेंट्स से ऐसे सवाल पूछा करते थे। अब चूंकि हम सतत बदलाव के साथ तालमेल बिठाने वाली जनरेशन से थे और एजुकेटेड भी तो हमने तुम्हारी क्यों, क्या, कैसे के सही जवाब इंटरनेट पर ढूंढ़े, विशेषज्ञों से पूछे और तुम्हें दिए।

जब आप किसी को उसके सवालों के सही जवाब देते हैं और वो जवाब उन्हें रुच जाते हैं तो सवाल पूछने वाला उस मुद्दे को और गहराई से जानना चाहता है। और तुम लोगों को तो यूं भी मोबाइल और इंटरनेट जैसी चीज़ें पैदा होने के साथ ही मिली थीं। तुम ज़्यादा इन्क्विज़िटिव हुए, तुमने अपने सवालों के जवाब ख़ुद भी इंटरनेट पर खंगाले और मिले हुए जवाबों को अपनी समझ से प्रॉसेस भी किया। तुम केवल स्कूल में पढ़ाए गए सलेबस में ही नहीं अटके रहे, तुमने इसके इतर भी बहुत कुछ देखा, सीखा और जाना। ज़ाहिर है, इंटरनेट के ज़रिए। और ये तुम्हारा अपना हासिल था/है।

इस नॉलेज से तुम और भी कॉन्फ़िडेंट हुए। और हमारी हर उस बात पर, जो हमने अपने पैरेंट्स की संस्कार वाली बेड़ियों से सीखकर तुम्हें समझाना/सिखाना चाहा, तुमने हमेशा वाजिब सवाल उठाए। जैसे-

हमने कहा – बड़ों की बात मानते हैं!
तुमने पूछा – सारी बातें? क्या बड़े ग़लत नहीं हो सकते? और यदि बड़े ग़लत हों तो भी? उन्हें ग़लत होने पर टोका क्यों नहीं जा सकता?
हमने कहा – बड़ों से तमीज़ से बात करो।
तुमने कहा – फिर उनका टोन भी तो तमीज़ भरा होना चाहिए। रिस्पेक्ट तो म्यूचुअल है, दोगे तो मिलेगा।
हमने कहा – लड़के रोते थोड़े ही हैं?
तुमने पूछा – क्यों? क्या उनके भीतर इमोशन्स नहीं होते?
हमने कहा – लड़कियों को इतनी रात तक बाहर नहीं रहना चाहिए।
तुमने पूछा – क्यों? यदि हमें लड़कों से ख़तरा है तो उन्हें बांधकर रखो, लड़कियों पर समय की पाबंदी क्यों लाद रहे हो?

तुम्हारे ऐसे जवाब सुन-सुनकर हमें हर बार कल्चरल शॉक लगते रहे, पर चूंकि हम एजुकेटेड थे, अडैप्ट करने की, तालमेल बिठाने की क्षमता थी हममें इसलिए जब भी गहराई से तुम्हारे जवाबों पर ग़ौर किया तो पाया कि तुम्हारे सवाल जायज़ हैं, अपनी जगह सही हैं। उनके जवाब ढूंढ़ने के क्रम में अक्सर हम तुमसे सहमत हुए बिना नहीं रह सके।

पर यक़ीन मानो, तुम्हें बड़ा करने के दौरान तुम्हारे विद्रोही स्वभाव ने हमें हमेशा इस डाउट में रखा कि पता नहीं हम तुम्हें सही परवरिश दे भी पा रहे हैं या नहीं। ये भी हम ही जानते हैं कि अपनी हर जायज़ मांग को पूरा करवाने के लिए तुम हमेशा अड़े रहे और अपने संस्कारों की बेड़ियों वाली परवरिश के बावजूद, तुम्हारी सही मांगों के आगे हम झुकते भी रहे, तुमसे सीखते भी रहे।

दरअसल, बच्चों और पैरेंट्स के बीच का रिश्ता ऐसा होता है कि दोनों ही एक-दूसरे से सीखते हैं। पहले तो बच्चे अपने पैरेंट्स से सीखते हैं, पर उन्हें सिखाते हुए पैरेंट्स भी तो पैरेंट्स बनना सीखते हैं न? फिर पैरेंट्स अपने बच्चों से भी बहुत कुछ सीखते हैं। हमने तुम्हें क्या सिखाया ये तो तुम बताओगे (कुछ तो बता ही चुके हो!) पर तुमने हमें क्या सिखाया (जो हमने शॉक लगा… शॉक लगा… शॉक लगा… गाते हुए सीखा), वो ये रहा:

– लिमिट्स और बाउंडरीज़ सेट करना
– सेल्फ़ रेस्पेक्ट को तवज्जो देना
– सही बात पर अड़ जाना, उसे मनवा लेना
– अपने हक़ के लिए लड़ना, साथ मिलकर लड़ना
– दूसरों के ओपिनियन को वैल्यू करना
– रिलेशनशिप्स को खुले नज़रिए से देखना
– दुनिया को लड़कियों के लिए महफ़ूज़ बनाना

और हां! शिक्षा को लेकर अपने हक़ के लिए जो आंदोलन तुमने किया, जिस बेबाकी से किया, जिस हौसले से किया, जिस दबंगता से किया और इस तरह डटे रहे कि वहां मौजूद लड़कियों को, युवतियों को किसी तरह की दहशत नहीं हुई, बल्कि सुरक्षित महसूस हुआ… हम पैरेंट्स/ जेन एक्स तुम्हें लेकर मुतमइन हैं कि इस दुनिया को, जहां कई अच्छी बातें भी हैं और कई मुश्क़िलात भी, एक समझदार और ज़िम्मेदार जनरेशन मिल गई है।
लव यू जेन ज़ी! प्राउड ऑफ़ यू!

 

Tags: Cockroach Janata Partyeducation systemGen XGen ZJantar Mantar protestNEET examopen letterpaper leakRahul GandhiSonam Wangchukओपन लेटरकॉकरोच जनता पार्टीजंतर-मंतर धरनाजेन एक्सजेन ज़ीनीट परीक्षापेपर लीकराहुल गांधीशिक्षा व्यवस्थासोनम वांगचुक
शिल्पा शर्मा

शिल्पा शर्मा

पत्रकारिता का लंबा, सघन अनुभव, जिसमें से अधिकांशत: महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर कामकाज. उनके खाते में कविताओं से जुड़े पुरस्कार और कहानियों से जुड़ी पहचान भी शामिल है. ओए अफ़लातून की नींव का रखा जाना उनके विज्ञान में पोस्ट ग्रैजुएशन, पत्रकारिता के अनुभव, दोस्तों के साथ और संवेदनशील मन का अमैल्गमेशन है.

Related Posts

kalpana-lajmi_bhupen-hazarika
ओए हीरो

रूह की रवायत में लिखा इश्क़: कल्पना और भूपेन हजारिका के प्रेम और समर्पण की अनंत कहानी

March 10, 2026
किताब उत्सव: साहित्य, संगीत और रंगमंच की प्रस्तुतियों के साथ हुआ समापन
सुर्ख़ियों में

किताब उत्सव: साहित्य, संगीत और रंगमंच की प्रस्तुतियों के साथ हुआ समापन

February 11, 2026
धुनों पर गीत लिखना एक रचनात्मक सुविधा: गुलज़ार
सुर्ख़ियों में

धुनों पर गीत लिखना एक रचनात्मक सुविधा: गुलज़ार

February 10, 2026
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum