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Home बुक क्लब कविताएं

उसे मां कहते हैं: रायसाहब की कविता

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
May 9, 2021
in कविताएं, बुक क्लब
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उसे मां कहते हैं: रायसाहब की कविता
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कवियों-लेखकों ने मां को परिभाषित करने का हर युग में प्रयास किया है. सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म इंस्टाग्राम पर हिंदी लिखनेवालों में अपनी ख़ास पहचान बना चुके युवा कवि रायसाहब यादव यहां पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि किसे मां कहते हैं… पढ़ें, उनकी इमोशनल कविता ‘उसे मां कहते हैं’.

जो तुम्हारी पहली सांस से लेकर
अपनी आख़िरी सांस तक
तुम्हें बिना किसी लालच के चाहे…
उसे मां कहते हैं!

जो अनपढ़ होकर भी,
तुम्हारी उदासी को बिन कहे पढ़ जाए…
उसे मां कहते हैं!

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जो पति और बच्चों की अनदेखी पर भी
उनके लिए अपनी पूरी ज़िंदगी
क़ुर्बान कर दे…
उसे मां कहते हैं!

जो तुम्हारी ज़रूरतों के आगे
अपनी ख़्वाहिशें घटाती जाए…
उसे मां कहते हैं!

जिसका पूरा जीवन
घर-परिवार-रिश्तों में तालमेल
बैठाने में बीत जाए…
उसे मां कहते हैं!

जो बिना तनख़्वाह के
अपनी पूरी ज़िंदगी
तुम्हारी ज़िंदगी संवारने में
गुज़ार दे…
उसे मां कहते हैं!

जो तुम्हारी ग़लतियों पर
तुम्हें पीटकर ख़ुद
फफक कर रो पड़े…
उसे मां कहते हैं!

जो बुख़ार होने पर भी
तुम्हारे लिए खाना बनाए…
उसे मां कहते हैं!

जो पागल होने के बाद भी
अपने बच्चों का नाम
बार-बार दोहराए…
उसे मां कहते हैं!

Illustration: Pinterest


रायसाहब यादव
इंस्टाग्राम पर हिंदी में लिखनेवालों में रायसाहब एक जानामाना नाम हैं. अपने बेबाक टू लाइनर्स और दिल को छू लेनेवाली लंबी कविताओं के अलावा रायसाहब विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं. इंस्टाग्राम पर आप @officialraysahab इस पेज पर जाकर इनकी रचनाएं पढ़ सकते हैं. आपको बता दें कि वैसे रायसाहब एक एड्वर्टाइजिंग एजेंसी में सीनियर क्रिएटिव राइटर के तौर पर कार्यरत हैं.

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हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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