इस डिजिटल युग में बच्चों की आंखों का यूं रखें ख़्याल
यदि स्कूल जाने वाले बच्चों के माता-पिता हैं तो हमें पता है कि कोरोना काल से पहले आप उनके स्क्रीन...
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यदि स्कूल जाने वाले बच्चों के माता-पिता हैं तो हमें पता है कि कोरोना काल से पहले आप उनके स्क्रीन...
हमें पता है कि अच्छी तरह हेयरस्टाइल बना लेने के बाद जब आप आईने में ख़ुद को निहारती हैं और...
नर्म-मुलायम और ख़ूबसूरत पैर तो हर युवती की चाहत होते हैं, जिन्हें देखते ही कोई कह बैठे- आपके पैर बहुत...
कई बार अपनों के मना करने के बाद भी हम किसी ज़िद पर अड़ जाते हैं, कई बार ऐसी ज़िद...
कवि कुंवर बेचैन की कविताएं भले ही छोटी होती थीं, पर उनकी फ़िलॉसफ़ी बहुत ही बड़ी होती थी. दूरियों और...
क्या हमारी तरह आपको भी फ्रिल वाली यानी रफ़ल्ड ड्रेसेस पसंद हैं? हमें तो फ्रिल वाली ड्रेसेस फ़ेयरी टेल्स की...
लड़कियों के छतों पर आने के क्या मायने होते हैं, लड़कों के लिए? इस बात को समझने के लिए लोकप्रिय...
वह कौन-कौन सी परिस्थितियां है, जब आदमी अपना ईमान बेचने को मजबूर हो जाता है? अदम गोंडवी की यह कविता...
छायावादी कवि सूर्यकांत निराला की प्रसिद्ध कविता ‘वह तोड़ती पत्थर’ केवल एक मज़दूर स्त्री की दशा ही नहीं प्रस्तुत करती,...
केवल विश्व पर्यावरण दिवस के दिन चंद बातें लिखकर हम पर्यावरण को नहीं बचा सकते. हम जिस तरह अपने पर्यावरण...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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