बहुत नहीं सिर्फ़ चार कौए थे काले: भवानी प्रसाद मिश्र की कविता
यूं तो इस कविता को कवि ने बरसों पहले लिखा था, लेकिन इसका आज के समय से बहुत साम्य है....
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यूं तो इस कविता को कवि ने बरसों पहले लिखा था, लेकिन इसका आज के समय से बहुत साम्य है....
यह एक सच्चाई है कि दुनिया केवल आपकी हार्ड पावर, जैसे -आर्थिक या सैन्य शक्ति से ही प्रभावित नहीं होती,...
क्या होता है जब लोकतंत्र में भी लोग राजा चुनने लगें और तीस पर वो राजा अनपढ़ हो... यह कविता...
बजट आए यूं तो 10 दिन से ज़्यादा का समय गुजर गया है, लेकिन आम वैतनिक मध्यमवर्गीय बजट के सदमे...
अपने आसपास की रूटी न घटनाओं और लोगों को संवेदनशीलता की नज़र से एक कवि ही देख सकता है. बूढ़ापे...
क्या आपको भी लगता है कि ज़िंदगी में कोई मज़ा नहीं है, रस नहीं है? तो फिर आपको जाने-माने गांधीवादी...
नीट की परीक्षा, हमारे समूचे शिक्षण तंत्र की, हमारे समाज की और कुल-मिलाकर हमारे देश की बहुत बड़ी परीक्षा ले...
जब से इंटरनेट आया है, परिवहन के साधन उन्नत हुए हैं, पूरा विश्व जैसे एक ग्लोबल गांव में तब्दील हो...
मनुष्य द्वारा स्वयं को इस दुनिया का नियंता समझने की ग़लतफ़हमी को दूर करती यह कविता बताती है कि इस...
एक ख़ूबसूरत लड़की के पीछे लट्टू हो रहे एक शादीशुदा पुरुष की अजीबोग़रीब मनोस्थिति की मज़ेदार कहानी है ‘आठवां आश्चर्य’....
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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