बौड़म: कहानी एक पागल की (लेखक: मुंशी प्रेमचंद)
क्या दुनिया जिसे बौड़म यानी पागल कहती है, वह सचमुच पागल होता है? मुझे देवीपुर गए पांच दिन हो चुके...
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क्या दुनिया जिसे बौड़म यानी पागल कहती है, वह सचमुच पागल होता है? मुझे देवीपुर गए पांच दिन हो चुके...
जैसे-जैसे पुराना समय बीत रहा है, कई बातों में बदलाव आ रहा है. नई चीज़ों की अच्छाई और बुराई के...
मनुष्य को दूसरे जीव-जंतुओं से श्रेष्ठ क्यों माना गया है? एक सच्चे मनुष्य और उसकी मनुष्यता की तमाम परिभाषाएं बता...
भारत-पाकिस्तान विभाजन ने भारतीय उपमहाद्वीप के नक्शे पर दो नए मुल्क रख दिए, पर इस बंटवारे ने हज़ारों-लाखों लड़कियों का...
फ़ैशन एक ऐसी चीज़ है, जिसके अंदाज़ जब और जहां देखने मिलें, देख लेना चाहिए. इससे हमारा फ़ैशन सेंस सुधरता...
कुछ लोग आज़ादी मिलने के पहले भी आज़ाद थे और कुछ लोग कभी आज़ाद नहीं हो सकते. इसी सच्चाई का...
मस्कारा लगा कर हमारी आंखों को जादुई आकर्षण देने वाले मस्कारा वान्ड्स के अलग-अलग प्रकार और उनके इस्तेमाल के बारे...
अंडे सेहत के लिए अच्छे होते हैं, यह बात तो हम सभी जानते हैं. तभी तो इसका विज्ञापन कहता है...
गांवों में बिजली पहुंचने से पहले पेट्रोमेक्स लैम्प से वहां की रातें रौशन होती थी. पेट्रोमेक्स लैम्प को देहातों में...
तेज़ी से बदल रहे शहरी, ग्रामीण और क़स्बाई लैंडस्केप को शब्दों के कैनवास पर उतारती अरुण कमल की कविता ‘नए...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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