• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब

मेरा चीज़ किसने हटाया: बेशकीमती सबक रूपी मोतियों की छोटी-सी माला

सर्जना चतुर्वेदी by सर्जना चतुर्वेदी
April 3, 2022
in बुक क्लब, समीक्षा
A A
मेरा चीज़ किसने हटाया: बेशकीमती सबक रूपी मोतियों की छोटी-सी माला
Share on FacebookShare on Twitter

मुसीबत और अच्छे दिनों में हमारा व्यवहार यह तय करता है कि हमारी ज़िंदगी कैसी होगी. डॉ स्पेंसर जॉनसन ने अपनी किताब ‘मेरा चीज़ किसने हटाया’ में इसी बात को रोचक तरीक़े से समझाया है. अगर आपको भी लगता है कि आपकी ज़िंदगी कष्टों से भरी है तो एक बार यह किताब पढ़कर देखें.

पुस्तक: मेरा चीज़ किसने हटाया
लेखक: डॉ स्पेंसर जॉनसन
प्रकाशक: मंजुल प्रकाशन
मूल्य: 250
कैटेगरी: सेल्फ़ हेल्प
उपलब्ध: amazon.in
रेटिंग: 4.5/5 स्टार
समीक्षक: सर्जना चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार

यह किताब सेल्फ़ हेल्प कैटेगरी की मैनेजमेंट की प्रसिद्ध किताब हू मूव्ड माय चीज़ का हिंदी अनुवाद है. हम सभी की ज़िंदगी में बदलाव के दौर आते रहते हैं, लेकिन बदलाव की इस प्रक्रिया की रफ़्तार तय होती है. ऐसे में जब हम इसे समझ नहीं पाते हैं और अचानक कोई बड़ा बदलाव एक झटके के रूप में हमारे सामने होता है, तो हमें समझ भी नहीं आता है कि हमसे कहां ग़लती हो गई और प्रतिक्रिया के रूप में तुरंत हम परिस्थितियों, संबंधित लोगों को दोष देने में जुट जाते हैं. जबकि ऐसी ही परिस्थिति में हमारे बीच कोई व्यक्ति ऐसा भी होता है जो अपनी ग़लतियों को स्वीकार करके अपनी ज़िंदगी में आई चुनौती को समय रहते पहचान जाता है और अपने हालात और व्यवहार में बदलाव करके अपने लक्ष्य को हासिल कर लेता है. यही मैसेज चार किरदारों स्निफ़ और स्करी नामक दो चूहों और दो छोटे लोग हेम और हॉ की कहानी के माध्यम से दिया गया है. जो हर दिन चीज़ की तलाश में रहते हैं.
स्निफ़ और स्करी समय पर आने वाली मुसीबत को पहचान लेते हैं और बिना थके, बिना परेशान हुए रोज़ाना उतनी ही मेहनत करते हैं, तो ऐसे में जब एक जगह चीज़ ख़त्म होता है, तो वह दूसरी जगह तलाश में जुट जाते हैं. वहीं हेम और हॉ को बड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद जब चीज़ का एक बड़ा भंडार मिल जाता है, तो वे वहीं आराम से रहने लगते हैं और इस बारे में सोचना भी बंद कर देते हैं कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब यह चीज़ ख़त्म हो जाएगा. ऐसे में जब एक दिन सारा चीज़ ख़त्म हो जाता है, तो वे संकट से घिर जाते हैं और परेशान हो जाते हैं. ऐसे में हॉ जहां नए चीज़ की तलाश में नई राह तलाशने लगता है, तो वहीं दूसरी ओर हेम शिकायत करता है, सोचता है कि कोई किसी दिन दोबारा वहां उस चीज़ को रख देगा. संघर्ष की यह छोटी-सी गाथा बेहद रोमांचकारी है. 92 पेज की इस किताब में जीवन के बेहद महत्वपूर्ण संदेश को बहुत कम शब्दों में पिरो दिया गया है.

इन्हें भीपढ़ें

किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

किसलिए?: भावना प्रकाश की कहानी

June 25, 2026
Kul_Devta_Ka_Chunaav

कुलदेवता का चुनाव: भावना प्रकाश की व्यंग्य कथा

May 25, 2026
नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026
माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
Tags: Dr Spencer JohnsonDr Spencer Johnson BookManjul PrakashanMera Cheese kisne hataya by Dr Spencer JohnsonWho moved my cheese by Dr Spencer Johnsonडॉ स्पेंसर जॉनसनडॉ स्पेंसर जॉनसन की किताबडॉ स्पेंसर जॉनसन सेल्फ़ हेल्प बुकमंजुल प्रकाशनमेरा चीज़ किसने हटाया
सर्जना चतुर्वेदी

सर्जना चतुर्वेदी

Related Posts

वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल
कविताएं

वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल

December 15, 2025
ummeed-ki-tarah-lautna-tum
ज़रूर पढ़ें

पाठक को विघटन के अंधेरे से उजाले की ओर मोड़ देती हैं ‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ की कविताएं

September 23, 2025
गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता
कविताएं

गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता

September 18, 2025
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum