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Home बुक क्लब कविताएं

मैं तो वही खिलौना लूंगा: सियारामशरण गुप्त की कविता

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
September 8, 2022
in कविताएं, बुक क्लब
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जो हमारे पास होता है, उस उससे ज़्यादा उस चीज़ को पाने की कामना करते हैं, जो हमारे पास नहीं होता. मैं तो वही खिलौना लूंगा कविता में इसी हक़ीक़त को रेखांकित किया गया है.

मैं तो वही खिलौना लूंगा मचल गया दीना का लाल
खेल रहा था जिसको लेकर राजकुमार उछाल-उछाल
व्यथित हो उठी मां बेचारी-था सुवर्ण-निर्मित वह तो
खेल इसी से लाल, नहीं है राजा के घर भी यह तो!

राजा के घर! नहीं-नहीं मां, तू मुझको बहकाती है
इस मिट्टी से खेलेगा क्या राजपुत्र, तू ही कह तो
फेंक दिया मिट्टी में उसने, मिट्टी का गुड्डा तत्काल
मैं तो वही खिलौना लूंगा–मचल गया दीना का लाल

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मैं तो वही खिलौना लूंगा–मचल गया शिशु राजकुमार
वह बालक पुचकार रहा था पथ में जिसको बारम्बार
वह तो मिट्टी का ही होगा, खेलो तुम तो सोने से
दौड़ पड़े सब दास-दासियां राजपुत्र के रोने से

मिट्टी का हो या सोने का, इनमें वैसा एक नहीं
खेल रहा था उछल-उछलकर वह तो उसी खिलौने से
राजहठी ने फेंक दिए सब अपने रजत-हेम-उपहार
लूंगा वहीं, वही लूंगा मैं! मचल गया वह राजकुमार

Illustration: Pinterest

Tags: Aaj ki KavitaHindi KavitaHindi PoemKavitaMain to vahi khilauna loonga by Siyaramsharan GuptSiyaramsharan GuptSiyaramsharan Gupt Poetryआज की कविताकवितामैं तो वही खिलौना लूंगामैं तो वही खिलौना लूंगा सियारामशरण गुप्तसियारामशरण गुप्तसियारामशरण गुप्त की कविताहिंदी कविता
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ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
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