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मिलो गले से गले बार बार होली में: नज़ीर बनारसी की नज़्म

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
March 29, 2021
in कविताएं, बुक क्लब
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मिलो गले से गले बार बार होली में: नज़ीर बनारसी की नज़्म
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गंगा-जमुनी संस्कृति के जाने-माने शायर नज़ीर बनारसी ने तमाम सामाजिक मुद्दों पर लिखते थे. उन्होंने ज़िंदगी के तमाम रंगों पर लिखा. प्रस्तुत है होली पर उनकी एक मशहूर नज़्म ‘मिलो गले से गले बार बार होली में’.

कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में
अदा से प्रेम करो दिल से प्यार होली में
गले में डाल दो बांहों का हार होली में
उतारो एक बरस का ख़ुमार होली में

मिलो गले से गले बार बार होली में

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लगा के आग बढ़ी आगे रात की जोगन
नए लिबास में आई है सुबह की मालन
नज़र नज़र है कुंवारी अदा अदा कमसिन
हैं रंग रंग से सब रंग-बार होली में

मिलो गले से गले बार बार होली में

हवा हर एक को चल फिर के गुदगुदाती है
नहीं जो हंसते उन्हें छेड़ कर हंसाती है
हया गुलों को तो कलियों को शर्म आती है
बढ़ाओ बढ़ के चमन का वक़ार होली में

मिलो गले से गले बार बार होली में

ये किस ने रंग भरा हर कली की प्याली में
गुलाल रख दिया किस ने गुलों की थाली में
कहां की मस्ती है मालन में और माली में
यही हैं सारे चमन की पुकार होली में

मिलो गले से गले बार बार होली में

तुम्हीं से फूल चमन के तुम्हीं से फुलवारी
सजाए जाओ दिलों के गुलाब की क्यारी
चलाए जाओ नशीली नज़र से पिचकारी
लुटाए जाओ बराबर बहार होली में

मिलो गले से गले बार बार होली में

मिले हो बारा महीनों की देख-भाल के ब’अद
ये दिन सितारे दिखाते हैं कितनी चाल के ब’अद
ये दिन गया तो फिर आएगा एक साल के ब’अद
निगाहें करते चलो चार यार होली में

मिलो गले से गले बार बार होली में

बुराई आज न ऐसे रहे न वैसे रहे
सफ़ाई दिल में रहे आज चाहे जैसे रहे
ग़ुबार दिल में किसी के रहे तो कैसे रहे
अबीर उड़ती है बन कर ग़ुबार होली में

मिलो गले से गले बार बार होली में
हया में डूबने वाले भी आज उभरते हैं
हसीन शोख़ियां करते हुए गुज़रते हैं
जो चोट से कभी बचते थे चोट करते हैं
हिरन भी खेल रहे हैं शिकार होली में

मिलो गले से गले बार बार होली में


शायर: नज़ीर बनारसी
पुस्तक: कुलियत-ए-नज़ीर बनारसी
प्रकाशन: एजुकेशनल पब्लिशिंग हाउस
Illustration: Pinterest

Tags: Aaj ki KavitaHindi KavitaHindi PoemKavitaNazir BanarasiNazir Banarasi Poem CollectionNazir Banarasi Poetryआज की कविताउर्दू के शायरकवितानज़ीर बनारसीनज़ीर बनारसी की कवितामिलो गले से गले बार बार होली मेंहिंदी कविताहोली कविता
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