• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब कविताएं

मदर्स डे पर ब्रज श्रीवास्तव की 5 कविताएं

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
May 9, 2021
in कविताएं, बुक क्लब
A A
मदर्स डे पर ब्रज श्रीवास्तव की 5 कविताएं
Share on FacebookShare on Twitter

मां कहने को तो एक शब्द है, पर जब इसे परिभाषित करने जाएं तो दुनिया के सारे शब्द कम पड़ जाते हैं. इस मदर्स डे हम लाए हैं कवि ब्रज श्रीवास्तव ‘मां’ पर लिखी पांच कविताएं.

1. मां की ढोलक

ढोलक जब बजती है
तो ज़रूर पहले
वादक के मन में बजती होगी

इन्हें भीपढ़ें

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026
माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल

वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल

December 15, 2025
ummeed-ki-tarah-lautna-tum

पाठक को विघटन के अंधेरे से उजाले की ओर मोड़ देती हैं ‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ की कविताएं

September 23, 2025

किसी गीत के संग
इस तरह चलती है
कि गीत का सहारा हो जाती है
और गीत जैसे नृत्य करने लग जाता है… जिसके पैरों में
घुंघरू जैसे बंध जाती है ढोलक की थाप

ऐसी थापों के लिए
मां बख़ूबी जानी जाती है,
कहते हैं ससुराल में पहली बार
ढोलक बजाकर
अचरज फैला दिया था हवा में उसने

उन दिनों रात में
ढोलक-मंजीरों की आवाज़ सुनते-सुनते ही
सोया करते थे लोग
दरअसल तब लोग लय में जीते थे
जीवन की ढोलक पर लगी
मुश्क़िलों की डोरियों को
ख़ुशी-ख़ुशी कस लेते थे
बजाने के पहले

अब यहां जैसा हो रहा है
मैं क्या कहूं
उत्सव में हम सलीम भाई को
बुलाते हैं ढोलक बजाने
और कोई नहीं सुनता

इधर मां पैंसठ पार हो गई है
उसकी गर्दन में तक़लीफ़ है
फिर भी पड़ोस में पहुंच ही जाती है
ढोलक बजाने

हम सुनते हैं मधुर गूंजें
थापें अपना जादू फैलाने लगती हैं
मां ही है उधर
जो बजा रही है
डूबकर ढोलक

***

2. पिता के बाद मां

पिता के बाद मां
बदल-सी गई है
सबके सामने नहीं करती वह
पिता को याद

अकेले में चुपके से पोंछती है आंख
पिता की तस्वीर पर रखकर हाथ
कुछ कहती है मन ही मन
भीड़ या बाज़ार में
जब जाती है बेटे के संग
तो नहीं छोड़ना चाहती अंगुली
मंदिर जाने पर उसे प्रसाद ज़रूर दिलाती है

हमें रोने नहीं देती कभी
समझाती है यह कहकर
ये तो होता ही है जीवन में

मुझे उस दोस्त का
यह कहना अच्छा लगा
कि तुम्हारे पास अभी
मां तो है

***

3. मां का मोबाइल

आज इंतज़ार ही रहा
पर नहीं आया मां का फ़ोन

ज़रूर चार्ज नहीं हो पाया होगा
सुबह से सभी बच्चों से बात
करते-करते हो गया होगा डिस्चार्ज

मां आख़िर सीख ही ग‌ईं
फ़ोन संभालना
चश्मे में से देखकर जब वह
खोजती है बेटी का नंबर
अद्भुत दृश्य होता है
जैसे मिलने ही वाला हो उनको राहत का
ख़ज़ाना

कहीं जाते समय अब
दवाई के बैग के साथ साथ
मोबाइल और चार्जर रखना नहीं भूलती वह

दूर बैठे बच्चों को फ़ोन नहीं लग पाना
यानी अधूरी रह जाना
दिनचर्या
है मां के लिए

सबको साथ देखने की
तलब कुछ तो कम हो जाती है
जी भर के बतिया लेने से
सत्तर की उमर में
यही संवाद ही तो हैं जो मां की ख़ुशी की पौध में
पानी सींचते हैं

सबको सबसे है
हाल चाल नहीं पूछने की
शिकायत
पर मां ने अपने
मोबाइल से जोड़ रखा है रिश्तों को

मां से नहीं है
किसी को शिकायत

***

4. नया घर

उस घर में किताबें छूट गईं
इस घर में हमारे साथ टीवी आया बड़ा वाला आईना छूट गया
एक रोशन दान छूट गया

गाय के रंभाने का दृश्य छूट गया
मंदिर की आरती की आवाज़ें
छूट गईं

कामवाली बाई छूट गई
छूट गया दूधवाला
अख़बार वाला बिछड़ गया
लेकिन वही अख़बार
इस घर में रोज़ाना आ‌ रहा है

बहुत सारा समय छूट गया
उस घर में
इस घर में हमारे साथ नए समय का एक नमूना आया

जिसमें नए टाइल्स हैं और
छोटा-सा बगीचा है और
सामने बनते हुए नए-नए बंगले हैं

उस घर में भाई छूट गया
पड़ोसी भी छूट गए
और कुछ बच्चे भी
जो बाहर खेलते हुए
ध्यान खींचते थे

आ तो गई मां साथ
लेकिन उसका भी
आधा मन
तो उस घर में छूट गया

***

5. उनकी चिरैया

चिड़ियों ने जब
पाए बच्चे
बहुत ख़ुश रहे वे

मां-पिता के रूप में
दाना पानी
खिलाते
खिलाते
पता ही नहीं चला

कब उड़ना सीख ग‌ए बच्चे
अपना तिनका ख़ुद
चुनने के लिए
अब तो उड़ भी ग‌ई
उनकी चिरैया

Illustration: Pinterest


ब्रज श्रीवास्तव
पेशे से शिक्षक और रुचि से कवि विदिशा के ब्रज श्रीवास्तव की कविताएं और समीक्षाएं देश की प्रमुख साहित्यिक की पत्र-पत्रिकाओं में छपती रहती हैं. तमाम गुमी हुई चीज़ें, घर के भीतर घर, ऐसे दिन का इंतज़ार और आशाघोष इनके ये चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं.
पता: L-40, गोदावरी ग्रींस, विदिशा.
ईमेल: brajshrivastava7@gmail.com
फ़ोन: 9425034312/7024134312

Tags: Aaj ki KavitaBraj ShrivastavaBraj Shrivastava PoetryHindi KavitaHindi KavitayenHindi PoemKavitaMaa by Braj ShrivastavaPoet Braj Shrivastavaआज की कविताकवि ब्रज श्रीवास्तवकविताब्रज श्रीवास्तवब्रज श्रीवास्तव की कवितामांहिंदी कविताहिंदी कविताएं
टीम अफ़लातून

टीम अफ़लातून

हिंदी में स्तरीय और सामयिक आलेखों को हम आपके लिए संजो रहे हैं, ताकि आप अपनी भाषा में लाइफ़स्टाइल से जुड़ी नई बातों को नए नज़रिए से जान और समझ सकें. इस काम में हमें सहयोग करने के लिए डोनेट करें.

Related Posts

गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता
कविताएं

गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता

September 18, 2025
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए: गोपालदास ‘नीरज’ का गीत
कविताएं

अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए: गोपालदास ‘नीरज’ का गीत

June 12, 2025
कल चौदहवीं की रात थी: इब्न ए इंशा की ग़ज़ल
कविताएं

कल चौदहवीं की रात थी: इब्न ए इंशा की ग़ज़ल

June 4, 2025
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum