लिखना, महसूस करने की दूसरी सीढ़ी है. मीनाक्षी विजयवर्गीय की इस कविता में वैलेंटाइन्स डे के मौसम में एक पत्नी,...
मालकिन दीपा और सचहचरी सहायिका मीरा की बोरियत से भरती जा रही ज़िंदगी में तब रोमांचक आश्चर्य की एंट्री होती...
तुलसी दास और रामचरित मानस विवाद के बीच क़रीब 25 साल पहले प्रकाशित कविता संग्रह ‘माटी के वारिस’ की कविता...
हरिशंकर परसाई की यह रचना तो वैसे दशकों पहले की है. पर देश की मौजूदा आबोहवा में कहानीनुमा व्यंग्य ‘आवारा...
ज्ञान प्रकाश विवेक की ग़ज़ल संग्रह ‘गुफ़्तगू आवाम से है’ की ग़ज़लें अपने संग्रह के नाम के मुताबिक आवाम की...
शेखर की मां मर गई है. पर मां की यादें, उसकी बातें अब भी उसके मस्तिष्क में घूम रही हैं....
बाबुषा कोहली हमारे समय की ऐसी कवयित्री हैं, जिनकी कविताएं मन के भीतर सीधे उतरती हैं. उनकी कविताओं में मौजूद...
संवेदनशील कहानियों के लिए मशहूर लेखक गुलशेर ख़ान शानी ने कहानी ‘बोलनेवाले जानवर’ में दो अलग-अलग परिवेश में रहनेवालों की...
बेहतर अवसर की तलाश में अपने गांव को छोड़कर शहरों की ओर रुख़ करना ज़्यादातर लोगों की मजबूरी होती है....
विमला और अखिलेश मुंहबोले भाई-बहन हैं. विमला की शादी विनोद से हो जाती है. विनोद, अखिलेश का सहपाठी रह चुका...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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