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ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब कविताएं

वहां चार आदमी थे: बाबुषा कोहली की कविता

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
February 5, 2023
in कविताएं, ज़रूर पढ़ें, बुक क्लब
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वहां चार आदमी थे: बाबुषा कोहली की कविता
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बाबुषा कोहली हमारे समय की ऐसी कवयित्री हैं, जिनकी कविताएं मन के भीतर सीधे उतरती हैं. उनकी कविताओं में मौजूद प्रेम की मिठास, जीवन की लय, रहस्य, विमर्श और कई नए प्रयोग सहजता से मन में अपनी नायाब सी जगह बना लेते हैं.

 

पहला — शब्दों से भरा हुआ था
उसके मुंह से ही नहीं
नाक कान और आंखों से भी
शब्द टपकते थे
शब्दों के ढेर पर खड़ा
उसे गीता कंठस्थ थी
पर कृष्ण का पता न था

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दूसरा — अर्थों से भरा हुआ था
वह हर समय परिभाषाएं गढ़ता
मौसम खगोल रहस्य
आकाश पाताल
भूगोल राजनीति
कला प्रेम की
व्याख्या करता
अर्थों को खोजती उसकी नज़रें
मेरे उभारों और गोलाइयों की विवेचना करती थीं

तीसरा — मौन से भरा हुआ था
उसके माथे पर चन्दन चमकता
उसके मौन के चारों ओर अपार भीड़ थी
उसे पूजा जाता
उसका तना हुआ चेहरा देख लगता था
उसने अपनी ज़ुबान का गला दबा रखा हो
उसकी जबान को छोड़
बाक़ी सब कुछ बोलता था
उसके मौन में बहुत शोर था

और एक था चौथा आदमी
ख़ालीपन से भरा हुआ था
घुटनों के बल बैठा
आकाश को निहारता
उसकी ख़ाली आंखें भरी हुई थीं
खींचतीं थीं
जैसे ल्युनैटिक्स को
खींचता है चाँद
और मैं खिंच गई थी

उसके ख़ालीपन में मैंने
छलांग लगा दी
हम एक के भीतर एक थे
पर दो थे
हमारी सटी हुई त्वचाएं जल्द ही
ऐसी महीन रेशमी चादर में
बदल गईं
कि हवाएं उसके आर-पार जाती थीं
बौछारें वहां मुक़ाम बना टिक जाती थीं
हम दोनों की सटी हुई त्‍वचाओं के बीच भी
हमने ख़ाली ही छोड़ी थी वो ख़ाली जगह
अब उस ख़ाली जगह में
गिलहरियां फुदकती हैं
पपीहे गीत गाते हैं
तितलियों का रंग वहीं बनता है
चांद की कलाएं बदलने के बाद वहीं आकर रहती हैं
वहीं बहती रहती है शराब
झरने वहीं से फूटते हैं
और एक दरवेश एक हाथ से आकाश थामे
दूसरे से धरती सम्भाले
अपनी ही धुरी पर
घूमता रहता है गोल-गोल

Illustration: पिन्टरेस्ट

Tags: Babusha KohliBhaap ke ghar mein sheeshe ki ladkipoetry of babusha kohliprem gilahri dil akhrotप्रेम गिलहरी दिल अखरोटबाबुषा कोहलीबाबुषा कोहली की कविताभाप के घर में शीशे की लड़की
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ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

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फ़ोन: +91 9967974469
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