हम सभी स्कूली दिनों में कहावतें, सुभाषित रटते हैं. क्या फ़ायदा होता है इन कहावतों और सुभाषितों का? व्यंग्य सम्राट...
एक ऐसे समय में जब हम यह मानकर चलने लगे हैं कि हम हैं तो दुनिया है, केदारनाथ सिंह की...
एक औरत के जितना सामंजस्य बिठाकर भला और कौन चल सकता है. अपने पहले राजकीय प्रवास पर गई औरत के...
एक राजकुमार की शादी के अवसर पर आतिशबाज़ी के लिए लाए गए पटाख़ों की आपस में मनोरंजक बातचीत. एक रॉकेट...
कहते हैं एक भारत में कई-कई भारत बसते हैं. कहानी आदमी का बच्चा में आदमी के बच्चे और कुत्ते के...
ज़िंदगी का मज़ा उसके आसान होने में नहीं है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में किए संघर्ष में है. मैं तूफ़ानों में...
इश्क़ किसी भी उम्र में और किसी से भी हो सकता है. पर उसका परिणाम हर उम्र के लोगों के...
सतत चलती रहनेवाली, बहती रहनेवाली नदी भी सुस्ताना चाहती है. बिल्कुल एक कविता की तरह. गुलज़ार साहब की कविता ‘एक...
हिंदी के शुरुआती दौर के साहित्यकारों में एक माधवराव सप्रे की यह कहानी दिल छू लेगी. घर से बेघर की...
महिला वेदना और मुद्दों को आवाज़ देनेवाली कवयित्री निर्मला पुतुल उस पुरुषवादी समाज से सवाल कर रही हैं, जिसका मानना...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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