• होम पेज
  • टीम अफ़लातून
No Result
View All Result
डोनेट
ओए अफ़लातून
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक
ओए अफ़लातून
Home बुक क्लब कविताएं

मिटा पाओगे सब कुछ: निर्मला पुतुल की कविता

टीम अफ़लातून by टीम अफ़लातून
November 9, 2022
in कविताएं, बुक क्लब
A A
Nirmala-putul_Kavita
Share on FacebookShare on Twitter

महिला वेदना और मुद्दों को आवाज़ देनेवाली कवयित्री निर्मला पुतुल उस पुरुषवादी समाज से सवाल कर रही हैं, जिसका मानना है कि उसकी छत्रछाया में महिलाओं की स्थिति दिन-ब-दिन बेहतर होती जा रही है.

मिटा पाओगे सब कुछ?
तो मिटा दो न
भयानक काली रात को
जो बरबस उमड़ती-घुमड़ती
चुभती है मेरी आत्मा को
कैसे मिटा पाओगे
मेरी यातनामय गूंगी चीत्कार

क्या करोगे क्रूर नज़रों और नज़रानों का
निपट अकेले जूझ रही हूं जिनसे
मेरी नाभी में उठते शूल को?

इन्हें भीपढ़ें

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

नई पीढ़ी के क़िस्से – रंगे सियार की कहानी: भावना प्रकाश

April 23, 2026
माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

माँ तुम्हारा चूल्हा: अरुण चन्द्र रॉय की कविता

April 3, 2026
वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल

वो कभी मिल जाएं तो क्या कीजिए:अख़्तर शीरानी की ग़ज़ल

December 15, 2025
ummeed-ki-tarah-lautna-tum

पाठक को विघटन के अंधेरे से उजाले की ओर मोड़ देती हैं ‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ की कविताएं

September 23, 2025

मन सिंहासन पर विराजमान
इंसाफ़ मांगती स्त्री के उठते
बलात्कारित सवालों को
कैसे मिटा पाओगे?

क्या पांव में चुभे
कांटों की तरह
कुरेद निकाल फेंकोगे
आत्मा में फंसी हुई पिन
गर्भ में गड़ी हुई ज़हर बुझी तीर
अन्दर ही अन्दर
नासूर बन टीसती टीस को
मिटा पाओगे किसी जन्म में?

हज़ारों स्त्रियों के
बचाव में लड़ती
जो ख़ुद को बचा नहीं सकीं
तेरी हैवानियत से
हज़ारों स्त्रियों की उफनती बेबसी को
मेरे बलात्कारित होने का जबाव दे
क्या मिटा पाओगे उन सबकी बेबसी?

अभी-अभी जब बता रही हूं
क्या सुन रहे हो मेरी आवाज़
क्या समझा सकोगे ख़ुद को ही
अपने जीवन और जन्म के रहस्य?

सीधे-सीधे पूछती हूं तुमसे
रात के सन्नाटे में
क्या कभी कांपती नहीं है तुम्हारी रूह
क्या कुछ भी तुम्हें याद नहीं आता
सुनाई नहीं देती औरतों की हिचकियां
और मेरी चुप्पी
क्या तुम्हें सुनाई नहीं देता
क्या तुम सो पाते हो
बेख़बर हो नींद में
ले पाते हो खुली सांस
क्या पलक ढंपी आंखों से
दिखता नहीं मेरा मासूम चेहरा
अपनी निरीहता का सबूत मांगते?

क्या तुम्हें नहीं लगता कि
तुमने किया है क़त्ल मेरे विश्वास का
मेरी आबरू को सहेजने के बजाय
चढ़ा दी बलि
ऐसे में तुम पर समर्पित हो
कैसे कर लूं यक़ीन
क्या करूं न करूं
बोलो न
कैसे मिटा पाओगे मेरा यह संशय
यह दुख यह दर्द
और अंधेरा
जो जून से जून तक फैला है

Illustration: Pinterest

Tags: Aaj ki KavitaHindi KavitaHindi KavitayeinHindi KavitayenHindi PoemKavitaMita paoge sab kuch by Nirmala PutulNirmala PutulNirmala Putul PoetryPoet Nirmala Putulआज की कविताकवयित्री निर्मला पुतुलकवितानिर्मला पुतुलनिर्मला पुतुल की कवितामिटा पाओगे सब कुछहिंदी कविताहिंदी कविताएं
टीम अफ़लातून

टीम अफ़लातून

हिंदी में स्तरीय और सामयिक आलेखों को हम आपके लिए संजो रहे हैं, ताकि आप अपनी भाषा में लाइफ़स्टाइल से जुड़ी नई बातों को नए नज़रिए से जान और समझ सकें. इस काम में हमें सहयोग करने के लिए डोनेट करें.

Related Posts

गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता
कविताएं

गुरुत्वाकर्षण: हूबनाथ पांडे की कविता

September 18, 2025
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए: गोपालदास ‘नीरज’ का गीत
कविताएं

अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए: गोपालदास ‘नीरज’ का गीत

June 12, 2025
कल चौदहवीं की रात थी: इब्न ए इंशा की ग़ज़ल
कविताएं

कल चौदहवीं की रात थी: इब्न ए इंशा की ग़ज़ल

June 4, 2025
Facebook Twitter Instagram Youtube
ओए अफ़लातून

हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.

संपर्क

ईमेल: oye.aflatoon@gmail.com
फ़ोन: +91 9967974469
+91 9967638520

  • About
  • Privacy Policy
  • Terms

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum

No Result
View All Result
  • सुर्ख़ियों में
    • ख़बरें
    • चेहरे
    • नज़रिया
  • हेल्थ
    • डायट
    • फ़िटनेस
    • मेंटल हेल्थ
  • रिलेशनशिप
    • पैरेंटिंग
    • प्यार-परिवार
    • एक्सपर्ट सलाह
  • बुक क्लब
    • क्लासिक कहानियां
    • नई कहानियां
    • कविताएं
    • समीक्षा
  • लाइफ़स्टाइल
    • करियर-मनी
    • ट्रैवल
    • होम डेकोर-अप्लाएंसेस
    • धर्म
  • ज़ायका
    • रेसिपी
    • फ़ूड प्लस
    • न्यूज़-रिव्यूज़
  • ओए हीरो
    • मुलाक़ात
    • शख़्सियत
    • मेरी डायरी
  • ब्यूटी
    • हेयर-स्किन
    • मेकअप मंत्र
    • ब्यूटी न्यूज़
  • फ़ैशन
    • न्यू ट्रेंड्स
    • स्टाइल टिप्स
    • फ़ैशन न्यूज़
  • ओए एंटरटेन्मेंट
    • न्यूज़
    • रिव्यूज़
    • इंटरव्यूज़
    • फ़ीचर
  • वीडियो-पॉडकास्ट
  • लेखक

© 2022 - 2025 Oyeaflatoon - Managed & Powered by Zwantum