दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में एक बनारस की दार्शनिक व्याख्या करती है केदारनाथ सिंह की कविता ‘बनारस’. शिव की...
जिस दिन दुनिया चलाने की ज़िम्मेदारी औरत के कंधों पर आएगी, उस दिन दुनिया कैसी होगी? इस कल्पना में शब्द...
कभी किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता निदा फ़ाज़ली की मशहूर ग़ज़ल है. सबकुछ हासिल करने को उतावले हर इंसान...
पत्रकार, लेखिका सोनम गुप्ता की यह कविता उस सच्चाई को हर्फ़ दर हर्फ़ बयां करती है, जिससे मध्यमवर्ग की युवतियों...
आप दुनियाभर की दौलत कमा लें, पर सांसों से बड़ी दूसरी कोई पूंजी नहीं हो सकती. केदारनाथ सिंह की इस...
मनुष्य को दूसरे जीव-जंतुओं से श्रेष्ठ क्यों माना गया है? एक सच्चे मनुष्य और उसकी मनुष्यता की तमाम परिभाषाएं बता...
तेज़ी से बदल रहे शहरी, ग्रामीण और क़स्बाई लैंडस्केप को शब्दों के कैनवास पर उतारती अरुण कमल की कविता ‘नए...
अठारहवीं सदी के शायर-कवि नज़ीर अकबराबादी को आम आदमी का कवि कहा जाता था. अपनी लोकप्रिय रचना आदमी नामा में...
एक पिता के लिए बेटियां क्या होती हैं, बता रही है कुंवर बेचैन की कविता ‘बेटियां’. बेटियां शीतल हवाएं हैं...
बारिश सिर्फ़ आसमान से बरसती हुई पानी की बूंदें नहीं हैं, बल्कि एक कवि की नज़र से देखने पर बहुत...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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