हर बीतते दिन के साथ हम कहते हैं कि दुनिया बदल रही है और यहां जीना कठिन होता जा रहा...
बीते हुए समय की सुखद यादों को पकड़कर रखने से वर्तमान का दुख और भी बढ़ जाता है. आप चाह...
छोटे बच्चे की मनोहारी मुस्कान से सुंदर और सुकूनदायक और क्या हो सकता है? बाबा नागार्जुन की कविता यह दंतुरित...
किताबघर प्रकाशन से आए कवयित्री नीलेश रघुवंशी के कविता संग्रह ‘खिड़की खुलने के बाद’ से ली गई यह कविता मुहावरे...
बोधि प्रकाशन से हाल ही में आए अमृता सिन्हा के कविता संग्रह काल के करघे पर आखरों की कताई से...
वक़्त का चूल्हा जलते रहने के लिए ईंधन मांगता है. गुलज़ार साहब की कविता ईंधन उपलों की टेक लेकर बचपन...
सदियों तक समाज से दूर रही आबादी को आज़ादी के बाद एकबारगी सभी के साथ, उसी रफ़्तार से चलने के...
चाहे पेंच कसना हो या बातचीत, उसके साथ सहज रहना ज़रूरी है. पेंच को बेवजह कसने से उसकी चूड़ी मर...
मां और बेटी दो अलग-अलग पीढ़ियों और सोच का प्रतिनिधित्व करती हैं. बावजूद एक समय के बाद हर बेटी अपनी...
मां की महानता का वर्णन करने के लिए सबसे घिसी-पिटी कहावतों में एक है ‘भगवान हर जगह नहीं रह सकता...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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