इसी साल संसद के विशेष सत्र के दौरान भारतीय संसद ने लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में एक तिहाई सीटें...
हम जीवन की सांझ को सुहाना बनाने की चाहे कितनी ही प्लानिंग कर लें, पर नियति पर किसी का वश...
एआइ से जुड़ी बातों को समझने के लिए अशफ़ाक अहमद के नज़रिए के पहले दो आलेखों में हमने जाना कि...
कहते हैं फ़ैसले लेते समय शांत दिमाग़ का होना बहुत ज़रूरी है. पर हमारे अपने लेखक-चिकित्सक डॉ अबरार मुल्तानी की...
आर्टिफ़िशल इंटेलिजेंस यानी एआइ के बारे में हमें हॉलिवुड की साइंस फ़िक्शन फ़िल्में तब से चेताती रही हैं, जबकि एआइ...
आर्टिफ़िशल इंटेलिजेंस यानी एआइ के बारे में हमें साइंस फ़िक्शन फ़िल्मों ने तब से आगाह कर रखा है, जबकि एआइ...
कटी हुई पतंग, आसमान से गिरते हुए अपने साथ कई कहानियां साथ लाती है. एक पतंगवाले बूढ़े की कहानी की...
हिंदी साहित्य के चार स्तंभ सुमित्रानंदन पंत, जय शंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला कहलाते हैं. हिंदी साहित्य...
‘आज़ादी’ ये एक ऐसा शब्द है, जिसके मायने बहुत गहरे हैं, क्योंकि आज़ादी के साथ आपको केवल अधिकार ही नहीं...
अंधविश्वास सबसे अधिक औरतों पर प्रहार करता है. उधड़ी हुई कहानियों में लेखिका अमृता प्रीतम अंधविश्वास के चंगुल में फंसकर...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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