क्या आप उन लोगों में से हैं, जो चाहते हैं कि सुबह उठने के बाद आपका पूरा दिन तनाव मुक्त...
हमें बताया जाता है कि जो बड़ा है, ज़रूरी नहीं कि बेहतर भी हो. पर बड़ी इलायची के सेहत से...
बच्चों का बड़ा करने के कोई बने-बनाए नियम या फिर कोई सांचा नहीं आता. अपने बच्चे के स्वभाव, उनकी उम्र...
वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाठक के संपादन में हाल ही में आए कविता संग्रह ‘बहुत कुछ कहा हमने अकविता की वापसी’...
छोटे आकार से लगता है हमारी कोई पुरानी दुश्मनी है. हम छोटों को बेहद मामूली समझने लगते हैं. हमारी प्रचलित...
‘भारत के दलित, भारत में दलित’ की पांचवीं और अंतिम कड़ी में डॉ रामजीलाल दलितों के सही मायने में उत्थान...
यदि आप मौसम की गर्मी से परेशान हैं-तब भी, यदि आप घर पर पार्टी ऑर्गैनाइज़ कर रहे हैं-तब भी और...
भारत के लगभग हर घर और आंगन में जो पौधा हमें मिल जाता है वह है तुलसी. तुलसी हम भारतीयों...
चीज़ें बदल रही हैं या कहें बहुत-सी चीज़ें पूरी तरह बदल चुकी हैं. परिवार, संस्कार और त्यौहार सबकुछ आधुनिक हो...
रबिन्द्रनाथ टैगोर की यह लघुकथा लौकिक और अलौकिक सुख और इच्छाओं की बड़े ही संक्षेप में क्या अद्भुत व्याख्या करती...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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