रिश्तों में घुलने वाली ग़लतफ़हमियां और अहम् हमेशा ही रिश्तों के लिए घातक होते हैं. कई बार जब तक हम...
हमारे कई पाठकों और लेखकों को फ़िक्शन अफ़लातून प्रतियोगिता के बारे में देर से मालूम हुआ, जिसकी वजह से उनके...
जब हमें जीतना हो तो सबसे पहली शर्त होती है कि अपने संघर्षों को बेहद ध्यान से चुना जाए, ताकि...
कई बार जीवन में हमें जिससे प्यार होता है, हम उसके नहीं हो पाते या वो हमारा नहीं हो पाता....
प्यार तो बस प्यार होता है, उसे किसी झूठे दिखावे की कोई ज़रूरत नहीं होती. इसी सार्वकालिक सच को एक...
बहुत सारे दुखों या बिछोह या अकेलेपन से जूझते लोग यदि एक छत के नीचे आ कर अपने दुख भूल...
कई बार, कुछ लोग, कुछ फ़ैसलों के लिए अपने लोगों को भी माफ़ नहीं कर पाते. उनके भीतर एक द्वंद्व...
बदलाव की चाह में किसी महिला और पुरुष के बीच आकर्षण अस्वाभाविक नहीं है, फिर चाहे उनके बीच उम्र का...
आगामी 24 मार्च और 25 मार्च को दिल्ली में ITO के नजदीक सुरजीत भवन में पहले वैखरी का आयोजन होने...
फ़िल्म तू झूठी मैं मक्कार के बारे में जयंती रंगनाथन का कहना है कि इस फ़िल्म की कहानी में ख़ूब...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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