तब तुम क्या करोगे: ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता
महानगरों में रहनेवालों के लिए जातिप्रथा भले ही बीते कल की बात लगे, पर हमारे गांवों के सिलैबस में जातिवाद ...
महानगरों में रहनेवालों के लिए जातिप्रथा भले ही बीते कल की बात लगे, पर हमारे गांवों के सिलैबस में जातिवाद ...
शब्दों से खींची और कविता में ढली वरिष्ठ कवि लीलाधर जगूड़ी की रचना ‘सुबह का फोटू’ आपके सामने एक सजीव ...
प्रेम की कक्षा वह कक्षा है, जिसमें आप उम्रभर अटके रह सकते हैं, विनोद कुमार शुक्ल की कविता ‘कक्षा के ...
बहुत कुछ कर गुज़रने की इच्छा रखनेवाला आदमी किस तरह क़दम-क़दम पर थकान का शिकार होता है उसका लाजवाब वर्णन ...
भरोसा, प्यार, वफ़ा, बेवफ़ाई को एक साथ आवाज़ देती बशीर बद्र की ग़ज़ल ‘सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा’ ...
लोकतंत्र में जनता को ख़ुश करने का एक ज़रिया है. जिस लोकतंत्र को जनता अपनी जीत समझती है, उस लोकतंत्र ...
प्यार में नाउम्मीदी भी बहुत बड़ी उम्मीद होती है. दुनिया के सबसे टूटे दिल आशिक़ के दिल में भी उम्मीद ...
अधूरे पने में एक अद्भुत सौंदर्य होता है. भले ही अधूरी चीज़ें बेवजह की दिखें, पर उनका गहरा अर्थ होता ...
हम जीवन की आपाधापी में इतने उलझे होते हैं कि उम्र कब बीत जाती है, पता ही नहीं चलता. कुंवर ...
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और फ़िलॉसफ़ी में गहरा नाता है. पेशे से इंजीनियर रहे नरेश सक्सेना की कविता ‘पानी क्या कर रहा ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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